नाम्भोजाय शशी न चापि शशिने यद्रोचतेऽम्भोरुहं
किं तेन क्षतमस्ति किञ्चन जगत्येतस्य वा तस्य वा ।
लोकानन्दकयोः परं त्विह तयोः प्रेम्णैव भाव्यं मिथ-
स्तच्चेन्नाजनि तत्प्ररूढमयशः स्फारं विधेः केवलम् ॥
नाम्भोजाय शशी न चापि शशिने यद्रोचतेऽम्भोरुहं
किं तेन क्षतमस्ति किञ्चन जगत्येतस्य वा तस्य वा ।
लोकानन्दकयोः परं त्विह तयोः प्रेम्णैव भाव्यं मिथ-
स्तच्चेन्नाजनि तत्प्ररूढमयशः स्फारं विधेः केवलम् ॥
किं तेन क्षतमस्ति किञ्चन जगत्येतस्य वा तस्य वा ।
लोकानन्दकयोः परं त्विह तयोः प्रेम्णैव भाव्यं मिथ-
स्तच्चेन्नाजनि तत्प्ररूढमयशः स्फारं विधेः केवलम् ॥
अन्वयः
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यत् शशी अम्भोजाय न (रोचते), च अपि अम्भोरुहम् शशिने न रोचते, तेन जगति एतस्य वा तस्य वा किञ्चन क्षतम् किम् अस्ति? परम् तु इह लोक-आनन्दकयोः तयोः मिथः प्रेम्णा एव भाव्यम्। तत् चेत् न अजनि, तत् केवलम् विधेः स्फारम् प्ररूढम् अयशः (अस्ति)।
Summary
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The moon is not pleasing to the day-lotus, nor is the lotus pleasing to the moon. Is there any harm in the world to either of them because of this? No. But between these two, who both delight the world, there should have been mutual love. If that love was not born, it is simply the vast and great disgrace of Fate.
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| अम्भोजाय | अम्भोज (४.१) | for the lotus |
| शशी | शशिन् (१.१) | the moon |
| न | न | not |
| च | च | and |
| अपि | अपि | also |
| शशिने | शशिन् (४.१) | for the moon |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| रोचते | रोचते (√रुच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is pleasing |
| अम्भोरुहम् | अम्भोरुह (१.१) | the lotus |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| क्षतम् | क्षत (१.१) | harm |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is there |
| किञ्चन | किञ्चन (१.१) | any |
| जगति | जगत् (७.१) | in the world |
| एतस्य | एतद् (६.१) | of this one |
| वा | वा | or |
| तस्य | तद् (६.१) | of that one |
| वा | वा | or |
| लोकानन्दकयोः | लोक–आनन्दक (६.२) | of the two who delight the world |
| परम् | परम् | but |
| तु | तु | however |
| इह | इह | here |
| तयोः | तद् (६.२) | between those two |
| प्रेम्णा | प्रेमन् (३.१) | with love |
| एव | एव | only |
| भाव्यम् | भाव्य (√भू+ण्यत्, १.१) | there should be |
| मिथः | मिथस् | mutually |
| तत् | तद् (१.१) | that (love) |
| चेत् | चेत् | if |
| न | न | not |
| अजनि | अजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was born |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| प्ररूढम् | प्ररूढ (१.१) | great |
| अयशः | अयशस् (१.१) | disgrace |
| स्फारम् | स्फार (१.१) | vast |
| विधेः | विधि (६.१) | of fate |
| केवलम् | केवलम् | only |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | म्भो | जा | य | श | शी | न | चा | पि | श | शि | ने | य | द्रो | च | ते | ऽम्भो | रु | हं |
| किं | ते | न | क्ष | त | म | स्ति | कि | ञ्च | न | ज | ग | त्ये | त | स्य | वा | त | स्य | वा |
| लो | का | न | न्द | क | योः | प | रं | त्वि | ह | त | योः | प्रे | म्णै | व | भा | व्यं | मि | थ |
| स्त | च्चे | न्ना | ज | नि | त | त्प्र | रू | ढ | म | य | शः | स्फा | रं | वि | धेः | के | व | लम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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