लब्धा श्रीर्मुरवैरिणा पुरभिदा लब्धः स्वयं चन्द्रमा
देवैरप्सरसो मणिद्विपहयास्तत्स्वामिनैवाहृताः ।
एकस्मै स्वयमेकमेव वितरत्येतेषु चेत्सागर-
स्त्रैलोक्यं वशयेज्जडस्तु स वृथा विक्रम्य तैलुण्ठितः ॥
लब्धा श्रीर्मुरवैरिणा पुरभिदा लब्धः स्वयं चन्द्रमा
देवैरप्सरसो मणिद्विपहयास्तत्स्वामिनैवाहृताः ।
एकस्मै स्वयमेकमेव वितरत्येतेषु चेत्सागर-
स्त्रैलोक्यं वशयेज्जडस्तु स वृथा विक्रम्य तैलुण्ठितः ॥
देवैरप्सरसो मणिद्विपहयास्तत्स्वामिनैवाहृताः ।
एकस्मै स्वयमेकमेव वितरत्येतेषु चेत्सागर-
स्त्रैलोक्यं वशयेज्जडस्तु स वृथा विक्रम्य तैलुण्ठितः ॥
अन्वयः
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मुरवैरिणा श्रीः लब्धा, पुरभिदा स्वयम् चन्द्रमा लब्धः, देवैः अप्सरसः मणि-द्विप-हयाः आहृताः । सागरः चेत् एतेषु एकस्मै स्वयम् एकम् एव वितरति स्म, (तर्हि) त्रैलोक्यम् अवशयत् । तु सः जडः वृथा विक्रम्य तैः लुण्ठितः ।
Summary
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Shri was obtained by Vishnu, the moon by Shiva, and the Apsaras, gems, elephants, and horses were taken by the gods and their master Indra. If the ocean had given just one of these treasures to one person, it could have controlled the three worlds. But that fool was plundered by them in vain after they exerted themselves.
पदच्छेदः
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| लब्धा | लब्ध (√लभ्+क्त, १.१) | was obtained |
| श्रीः | श्री (१.१) | Shri (Lakshmi) |
| मुरवैरिणा | मुरवैरिन् (३.१) | by the enemy of Mura (Vishnu) |
| पुरभिदा | पुरभिद् (३.१) | by the destroyer of cities (Shiva) |
| लब्धः | लब्ध (√लभ्+क्त, १.१) | was obtained |
| स्वयम् | स्वयम् | himself |
| चन्द्रमा | चन्द्रमस् (१.१) | the moon |
| देवैः | देव (३.३) | by the gods |
| अप्सरसः | अप्सरस् (१.३) | the Apsaras |
| मणिद्विपहयाः | मणि–द्विप–हय (१.३) | gems, elephants, and horses |
| तत्स्वामिना | तत्–स्वामिन् (३.१) | by their master (Indra) |
| एव | एव | indeed |
| आहृताः | आहृत (आ√हृ+क्त, १.३) | were taken |
| एकस्मै | एक (४.१) | to one person |
| स्वयम् | स्वयम् | itself |
| एकम् | एक (२.१) | one thing |
| एव | एव | only |
| वितरति | वितरति (वि√तृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | had given |
| एतेषु | एतद् (७.३) | among these |
| चेत् | चेत् | if |
| सागरः | सागर (१.१) | the ocean |
| त्रैलोक्यम् | त्रैलोक्य (२.१) | the three worlds |
| वशयेत् | वशयेत् (√वश् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | could have controlled |
| जडः | जड (१.१) | fool |
| तु | तु | but |
| सः | तद् (१.१) | he |
| वृथा | वृथा | in vain |
| विक्रम्य | विक्रम्य (वि√क्रम्+ल्यप्) | after they exerted themselves |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| लुण्ठितः | लुण्ठित (√लुण्ठ्+क्त, १.१) | was plundered |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | ब्धा | श्री | र्मु | र | वै | रि | णा | पु | र | भि | दा | ल | ब्धः | स्व | यं | च | न्द्र | मा |
| दे | वै | र | प्स | र | सो | म | णि | द्वि | प | ह | या | स्त | त्स्वा | मि | नै | वा | हृ | ताः |
| ए | क | स्मै | स्व | य | मे | क | मे | व | वि | त | र | त्ये | ते | षु | चे | त्सा | ग | र |
| स्त्रै | लो | क्यं | व | श | ये | ज्ज | ड | स्तु | स | वृ | था | वि | क्र | म्य | तै | लु | ण्ठि | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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