राजा विप्रकुलस्य यस्य तनयः सोमः स वारान्निधे-
यः सर्वाश्रयणीयपादकमलस्तस्याश्रयोऽयं हरेः
आनीतश्चुलुकं स एव चलुकेऽप्यन्तः प्रवेश्येत
चेत्कः संवेदितुमीहते भगवतः कालस्य लीलायित्-
अम्
राजा विप्रकुलस्य यस्य तनयः सोमः स वारान्निधे-
यः सर्वाश्रयणीयपादकमलस्तस्याश्रयोऽयं हरेः
आनीतश्चुलुकं स एव चलुकेऽप्यन्तः प्रवेश्येत
चेत्कः संवेदितुमीहते भगवतः कालस्य लीलायित्-
अम्
यः सर्वाश्रयणीयपादकमलस्तस्याश्रयोऽयं हरेः
आनीतश्चुलुकं स एव चलुकेऽप्यन्तः प्रवेश्येत
चेत्कः संवेदितुमीहते भगवतः कालस्य लीलायित्-
अम्
अन्वयः
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यस्य विप्रकुलस्य राजा सोमः तनयः, यः सर्व-आश्रयणीय-पादकमलः (अस्ति), तस्य हरेः आश्रयः अयम् वाराम्निधिः । सः एव चुलुकम् आनीतः, चुलुके अपि अन्तः प्रवेश्येत चेत्, (तर्हि) भगवतः कालस्य लीलायितम् संवेदितुम् कः ईहते?
Summary
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This ocean is the son of Soma, king of the Brahmin caste, and the refuge of Hari (Vishnu), whose lotus feet are a sanctuary for all. If this very ocean was reduced to a handful of water (by Agastya) and could be contained within that handful, who can even attempt to comprehend the playful sport of divine Time?
पदच्छेदः
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| राजा | राजन् (१.१) | the king |
| विप्रकुलस्य | विप्रकुल (६.१) | of the Brahmin caste |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| तनयः | तनय (१.१) | son |
| सोमः | सोम (१.१) | Soma (the Moon) |
| सः | तद् (१.१) | that |
| वाराम्निधेः | वाराम्निधि (६.१) | of the ocean |
| यः | यद् (१.१) | who |
| सर्वाश्रयणीयपादकमलः | सर्व–आश्रयणीय–पाद–कमल (१.१) | whose lotus feet are a sanctuary for all |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| आश्रयः | आश्रय (१.१) | refuge |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| हरेः | हरि (६.१) | of Hari (Vishnu) |
| आनीतः | आनीत (आ√नी+क्त, १.१) | was brought |
| चुलुकम् | चुलुक (२.१) | to a handful |
| सः | तद् (१.१) | he |
| एव | एव | himself |
| चुलुके | चुलुक (७.१) | in a handful |
| अपि | अपि | even |
| अन्तः | अन्तर् | within |
| प्रवेश्येत | प्रवेश्येत (प्र√विश् +णिच् भावकर्मणोः विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | could be made to enter |
| चेत् | चेत् | if |
| कः | किम् (१.१) | who |
| संवेदितुम् | संवेदयितुम् (सम्√विद्+णिच्+तुमुन्) | to comprehend |
| ईहते | ईहते (√ईह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | attempts |
| भगवतः | भगवत् (६.१) | of the divine |
| कालस्य | काल (६.१) | of Time |
| लीलायितम् | लीलायित (२.१) | the playful sport |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | जा | वि | प्र | कु | ल | स्य | य | स्य | त | न | यः | सो | मः | स | वा | रा | न्नि | धे |
| यः | स | र्वा | श्र | य | णी | य | पा | द | क | म | ल | स्त | स्या | श्र | यो | ऽयं | ह | रेः |
| आ | नी | त | श्चु | लु | कं | स | ए | व | च | लु | के | ऽप्य | न्तः | प्र | वे | श्ये | त | चे |
| त्कः | सं | वे | दि | तु | मी | ह | ते | भ | ग | व | तः | का | ल | स्य | ली | ला | यि | तम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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