वर्षन्त्वम्बुमुचस्तपन्तु तपना मथ्नन्तु देवासुरा
बघ्नन्तु प्लवगाः पतन्तु सरितो गङ्गादिमाः सर्वतः ।
पुष्णातूत्पलबान्धवः प्रतिनिशं मुष्णातु वा बाडबो
नाब्धिः क्षुभ्यति न प्रसीदति ततो न क्षीयते नैधते ॥
वर्षन्त्वम्बुमुचस्तपन्तु तपना मथ्नन्तु देवासुरा
बघ्नन्तु प्लवगाः पतन्तु सरितो गङ्गादिमाः सर्वतः ।
पुष्णातूत्पलबान्धवः प्रतिनिशं मुष्णातु वा बाडबो
नाब्धिः क्षुभ्यति न प्रसीदति ततो न क्षीयते नैधते ॥
बघ्नन्तु प्लवगाः पतन्तु सरितो गङ्गादिमाः सर्वतः ।
पुष्णातूत्पलबान्धवः प्रतिनिशं मुष्णातु वा बाडबो
नाब्धिः क्षुभ्यति न प्रसीदति ततो न क्षीयते नैधते ॥
अन्वयः
AI
अम्बुमुचः वर्षन्तु, तपनाः तपन्तु, देवासुराः मथ्नन्तु, प्लवगाः बघ्नन्तु, गङ्गा-आदिमाः सरितः सर्वतः पतन्तु । उत्पलबान्धवः प्रतिनिशम् पुष्णातु, बाडबः वा मुष्णातु, ततः अब्धिः न क्षुभ्यति, न प्रसीदति, न क्षीयते, न एधते ।
Summary
AI
Let the clouds rain, the suns blaze, gods and demons churn, monkeys build a bridge, or the Ganga and other rivers fall into it. Let the moon nourish it nightly, or the submarine fire consume it. Despite all this, the ocean is neither agitated nor pleased; it neither diminishes nor increases.
पदच्छेदः
AI
| वर्षन्तु | वर्षन्तु (√वृष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them rain |
| अम्बुमुचः | अम्बु–मुच् (१.३) | the clouds |
| तपन्तु | तपन्तु (√तप् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them blaze |
| तपनाः | तपन (१.३) | the suns |
| मथ्नन्तु | मथ्नन्तु (√मन्थ् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them churn |
| देवासुराः | देव–असुर (१.३) | the gods and demons |
| बध्नन्तु | बध्नन्तु (√बन्ध् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them bind |
| प्लवगाः | प्लवग (१.३) | the monkeys |
| पतन्तु | पतन्तु (√पत् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them fall |
| सरितः | सरित् (१.३) | the rivers |
| गङ्गादिमाः | गङ्गा–आदिम (१.३) | beginning with Ganga |
| सर्वतः | सर्वतः | from all sides |
| पुष्णातु | पुष्णातु (√पुष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it nourish |
| उत्पलबान्धवः | उत्पल–बान्धव (१.१) | the friend of lotuses (the moon) |
| प्रतिनिशम् | प्रतिनिशम् | every night |
| मुष्णातु | मुष्णातु (√मुष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it steal |
| वा | वा | or |
| बाडबः | बाडब (१.१) | the submarine fire |
| न | न | not |
| अब्धिः | अब्धि (१.१) | the ocean |
| क्षुभ्यति | क्षुभ्यति (√क्षुभ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is agitated |
| न | न | not |
| प्रसीदति | प्रसीदति (प्र√सद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is pleased |
| ततः | ततः | due to that |
| न | न | not |
| क्षीयते | क्षीयते (√क्षि भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is diminished |
| न | न | not |
| एधते | एधते (√एध् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | increases |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | र्ष | न्त्व | म्बु | मु | च | स्त | प | न्तु | त | प | ना | म | थ्न | न्तु | दे | वा | सु | रा |
| ब | घ्न | न्तु | प्ल | व | गाः | प | त | न्तु | स | रि | तो | ग | ङ्गा | दि | माः | स | र्व | तः |
| पु | ष्णा | तू | त्प | ल | बा | न्ध | वः | प्र | ति | नि | शं | मु | ष्णा | तु | वा | बा | ड | बो |
| ना | ब्धिः | क्षु | भ्य | ति | न | प्र | सी | द | ति | त | तो | न | क्षी | य | ते | नै | ध | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.