स्निग्धश्यामलकोमलं दलमतिप्रच्छायशीतं तलं
भूपर्यन्तविलम्बिजम्भलफलस्थूलं च वृत्तं फलम् ।
सम्पश्यन्विजने वने व्यवसितस्तत्रैव वस्तुं सुखं
पान्थः पान्थमुखाद्विषद्रुमममुं दैवादवेत्य द्रुतः ॥
स्निग्धश्यामलकोमलं दलमतिप्रच्छायशीतं तलं
भूपर्यन्तविलम्बिजम्भलफलस्थूलं च वृत्तं फलम् ।
सम्पश्यन्विजने वने व्यवसितस्तत्रैव वस्तुं सुखं
पान्थः पान्थमुखाद्विषद्रुमममुं दैवादवेत्य द्रुतः ॥
भूपर्यन्तविलम्बिजम्भलफलस्थूलं च वृत्तं फलम् ।
सम्पश्यन्विजने वने व्यवसितस्तत्रैव वस्तुं सुखं
पान्थः पान्थमुखाद्विषद्रुमममुं दैवादवेत्य द्रुतः ॥
अन्वयः
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विजने वने स्निग्धश्यामलकोमलम् दलम्, अतिप्रच्छायशीतम् तलम्, भूपर्यन्तविलम्बि जम्भलफलस्थूलम् वृत्तम् फलम् च सम्पश्यन् पान्थः तत्र एव सुखम् वस्तुम् व्यवसितः । (सः) दैवात् पान्थमुखात् अमुम् विषद्रुमम् अवेत्य द्रुतः (अभवत्) ।
Summary
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In a lonely forest, a traveler saw a tree with smooth, dark leaves, a cool base with deep shade, and large, round fruits hanging to the ground. He decided to rest there comfortably. However, upon luckily learning from another traveler that it was a poison tree, he fled. This shows that external attractiveness can be deceptive, and one should not associate with someone of bad character, no matter how appealing they seem.
पदच्छेदः
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| स्निग्धश्यामलकोमलं | स्निग्ध–श्यामल–कोमल (२.१) | smooth, dark, and tender |
| दलम् | दल (२.१) | foliage |
| अतिप्रच्छायशीतं | अतिप्रच्छाय–शीत (२.१) | cool with deep shade |
| तलं | तल (२.१) | base |
| भूपर्यन्तविलम्बि | भूपर्यन्त–विलम्बिन् (वि√लम्ब्, २.१) | hanging down to the ground |
| जम्भलफलस्थूलं | जम्भल–फल–स्थूल (२.१) | as large as a citron fruit |
| च | च | and |
| वृत्तं | वृत्त (२.१) | round |
| फलम् | फल (२.१) | fruit |
| सम्पश्यन् | सम्पश्यत् (सम्√दृश्+शतृ, १.१) | seeing |
| विजने | विजन (७.१) | in a lonely |
| वने | वन (७.१) | forest |
| व्यवसितः | व्यवसित (वि+अव√सो+क्त, १.१) | decided |
| तत्र | तत्र | there |
| एव | एव | itself |
| वस्तुं | वस्तुम् (√वस्+तुमुन्) | to stay |
| सुखं | सुखम् | happily |
| पान्थः | पथिन् (१.१) | a traveler |
| पान्थमुखात् | पथिन्–मुख (५.१) | from the mouth of another traveler |
| विषद्रुमम् | विष–द्रुम (२.१) | as a poison tree |
| अमुं | अदस् (२.१) | this |
| दैवात् | दैव (५.१) | by luck |
| अवेत्य | अवेत्य (अव√इ+ल्यप्) | having learned |
| द्रुतः | द्रुत (√द्रु+क्त, १.१) | fled |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्नि | ग्ध | श्या | म | ल | को | म | लं | द | ल | म | ति | प्र | च्छा | य | शी | तं | त | लं |
| भू | प | र्य | न्त | वि | ल | म्बि | ज | म्भ | ल | फ | ल | स्थू | लं | च | वृ | त्तं | फ | लम् |
| स | म्प | श्य | न्वि | ज | ने | व | ने | व्य | व | सि | त | स्त | त्रै | व | व | स्तुं | सु | खं |
| पा | न्थः | पा | न्थ | मु | खा | द्वि | ष | द्रु | म | म | मुं | दै | वा | द | वे | त्य | द्रु | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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