आक्रामन्तु तमेव चूतमपि च क्रोशन्तु रेफोत्तरं
डिम्भोऽस्माकमसीति वाभिदधतां काका वराकाः स्वयम् ।
गन्तव्यं क्व ततोऽन्यतः परभृत क्षन्तव्यमेतावद-
प्यग्रे कस्य निवेद्यतामिदमतिक्रान्तो वसन्तोऽधुना ॥
आक्रामन्तु तमेव चूतमपि च क्रोशन्तु रेफोत्तरं
डिम्भोऽस्माकमसीति वाभिदधतां काका वराकाः स्वयम् ।
गन्तव्यं क्व ततोऽन्यतः परभृत क्षन्तव्यमेतावद-
प्यग्रे कस्य निवेद्यतामिदमतिक्रान्तो वसन्तोऽधुना ॥
डिम्भोऽस्माकमसीति वाभिदधतां काका वराकाः स्वयम् ।
गन्तव्यं क्व ततोऽन्यतः परभृत क्षन्तव्यमेतावद-
प्यग्रे कस्य निवेद्यतामिदमतिक्रान्तो वसन्तोऽधुना ॥
अन्वयः
AI
वराकाः काकाः तम् एव चूतम् आक्रामन्तु, रेफोत्तरम् क्रोशन्तु अपि च, 'अस्माकम् डिम्भः असि' इति वा स्वयम् अभिदधताम् । (हे) परभृत, ततः अन्यतः क्व गन्तव्यम्? एतावत् अपि क्षन्तव्यम् । अग्रे कस्य इदम् निवेद्यताम्? अधुना वसन्तः अतिक्रान्तः ।
Summary
AI
Let the wretched crows attack that same mango tree, caw harshly, and even claim, 'You are our child!' O cuckoo, where else is there to go from here? This much must be endured. To whom can this be reported? Spring is now over. This advises a noble person to endure the insults of the unworthy who have taken over, as there is no recourse now that their patron (Spring) is gone.
पदच्छेदः
AI
| आक्रामन्तु | आक्रामन्तु (आ√क्रम् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them attack |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| एव | एव | same |
| चूतम् | चूत (२.१) | mango tree |
| अपि | अपि | also |
| च | च | and |
| क्रोशन्तु | क्रोशन्तु (√क्रुश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them caw |
| रेफोत्तरं | रेफ–उत्तर (२.१) | harshly (with the letter 'r') |
| डिम्भः | डिम्भ (१.१) | child |
| अस्माकम् | अस्मद् (६.३) | our |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| इति | इति | thus |
| वा | वा | or |
| अभिदधतां | अभिदधताम् (अभि√धा कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them say |
| काकाः | काक (१.३) | crows |
| वराकाः | वराक (१.३) | wretched |
| स्वयम् | स्वयम् | themselves |
| गन्तव्यं | गन्तव्य (√गम्+तव्यत्, १.१) | is to be gone |
| क्व | क्व | where |
| ततः | ततः | from here |
| अन्यतः | अन्यतः | elsewhere |
| परभृत | परभृत (८.१) | O cuckoo |
| क्षन्तव्यम् | क्षन्तव्य (√क्षम्+तव्यत्, १.१) | must be endured |
| एतावत् | एतावत् (१.१) | this much |
| अपि | अपि | even |
| अग्रे | अग्र (७.१) | before |
| कस्य | किम् (६.१) | to whom |
| निवेद्यताम् | निवेद्यताम् (नि√विद् +णिच् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should it be told |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| अतिक्रान्तः | अतिक्रान्त (अति√क्रम्+क्त, १.१) | is past |
| वसन्तः | वसन्तः (१.१) | spring |
| अधुना | अधुना | now |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | क्रा | म | न्तु | त | मे | व | चू | त | म | पि | च | क्रो | श | न्तु | रे | फो | त्त | रं |
| डि | म्भो | ऽस्मा | क | म | सी | ति | वा | भि | द | ध | तां | का | का | व | रा | काः | स्व | यम् |
| ग | न्त | व्यं | क्व | त | तो | ऽन्य | तः | प | र | भृ | त | क्ष | न्त | व्य | मे | ता | व | द |
| प्य | ग्रे | क | स्य | नि | वे | द्य | ता | मि | द | म | ति | क्रा | न्तो | व | स | न्तो | ऽधु | ना |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.