मेघा इत्यवतीर्य केऽपि नभसः सर्व पयो गृह्णते
यादांसीति समागतास्तत इतोऽप्यन्ये रमन्ते सुखम् ।
यस्तु स्वान्तिक एव तस्य महतस्तालस्य कालाद्वहोः
शुष्कस्यापि हि नोपयोगकणिकां पश्यामि तेनाब्धिना ॥
मेघा इत्यवतीर्य केऽपि नभसः सर्व पयो गृह्णते
यादांसीति समागतास्तत इतोऽप्यन्ये रमन्ते सुखम् ।
यस्तु स्वान्तिक एव तस्य महतस्तालस्य कालाद्वहोः
शुष्कस्यापि हि नोपयोगकणिकां पश्यामि तेनाब्धिना ॥
यादांसीति समागतास्तत इतोऽप्यन्ये रमन्ते सुखम् ।
यस्तु स्वान्तिक एव तस्य महतस्तालस्य कालाद्वहोः
शुष्कस्यापि हि नोपयोगकणिकां पश्यामि तेनाब्धिना ॥
अन्वयः
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के अपि मेघाः इति अवतीर्य नभसः सर्वम् पयः गृह्णते । अन्ये ततः इतः अपि यादाम्सी इति समागताः सुखम् रमन्ते । यः तु स्वान्तिक एव, तस्य महतः, कालात् बहोः शुष्कस्य अपि तालस्य उपयोगकणिकाम् तेन अब्धिना हि न पश्यामि ।
Summary
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Some, descending as clouds from the sky, take all its water. Others, coming from here and there as aquatic creatures, enjoy themselves happily. But I see not even a particle of use from that ocean for the great palm tree right on its shore, which has been dry for a long time. This criticizes a great person (the ocean) who benefits distant strangers but neglects their own needy dependents.
पदच्छेदः
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| मेघाः | मेघ (१.३) | clouds |
| इति | इति | as |
| अवतीर्य | अवतीर्य (अव√तॄ+ल्यप्) | having descended |
| के | किम् (१.३) | some |
| अपि | अपि | indeed |
| नभसः | नभस् (५.१) | from the sky |
| सर्वम् | सर्व (२.१) | all |
| पयः | पयस् (२.१) | water |
| गृह्णते | गृह्णते (√ग्रह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | take |
| यादाम्सी | यादस् (१.३) | aquatic creatures |
| इति | इति | as |
| समागताः | समागता (सम्+आ√गम्+क्त, १.३) | having come together |
| ततः | ततः | from there |
| इतः | इतः | from here |
| अपि | अपि | also |
| अन्ये | अन्य (१.३) | others |
| रमन्ते | रमन्ते (√रम् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | enjoy |
| सुखम् | सुखम् | happily |
| यः | यद् (१.१) | which |
| तु | तु | but |
| स्वान्तिक | स्व–अन्तिक (७.१) | near itself |
| एव | एव | right |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| महतः | महत् (६.१) | great |
| तालस्य | ताल (६.१) | palm tree |
| कालात् | काल (५.१) | for time |
| बहोः | बहु (५.१) | a long |
| शुष्कस्य | शुष्क (६.१) | dry |
| अपि | अपि | even |
| हि | हि | indeed |
| न | न | not |
| उपयोगकणिकां | उपयोग–कणिका (२.१) | a particle of use |
| पश्यामि | पश्यामि (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I see |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| अब्धिना | अब्धि (३.१) | ocean |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मे | घा | इ | त्य | व | ती | र्य | के | ऽपि | न | भ | सः | स | र्व | प | यो | गृ | ह्ण | ते |
| या | दां | सी | ति | स | मा | ग | ता | स्त | त | इ | तो | ऽप्य | न्ये | र | म | न्ते | सु | खम् |
| य | स्तु | स्वा | न्ति | क | ए | व | त | स्य | म | ह | त | स्ता | ल | स्य | का | ला | द्व | होः |
| शु | ष्क | स्या | पि | हि | नो | प | यो | ग | क | णि | कां | प | श्या | मि | ते | ना | ब्धि | ना |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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