पीयन्तां तमसा दिशो विदधतां नीचाः पिशाचाः स्मयं
व्याक्रोशन्तु शिवाः कियच्चिरमसौ कालः सखे स्थास्यति ।
अद्योदेष्यति भानुरेष्यति दिशामद्य प्रसादो मुखे-
ध्वद्य स्वां प्रकृतिं गमिष्यति मही कोक क्षणं क्षम्यताम् ॥
पीयन्तां तमसा दिशो विदधतां नीचाः पिशाचाः स्मयं
व्याक्रोशन्तु शिवाः कियच्चिरमसौ कालः सखे स्थास्यति ।
अद्योदेष्यति भानुरेष्यति दिशामद्य प्रसादो मुखे-
ध्वद्य स्वां प्रकृतिं गमिष्यति मही कोक क्षणं क्षम्यताम् ॥
व्याक्रोशन्तु शिवाः कियच्चिरमसौ कालः सखे स्थास्यति ।
अद्योदेष्यति भानुरेष्यति दिशामद्य प्रसादो मुखे-
ध्वद्य स्वां प्रकृतिं गमिष्यति मही कोक क्षणं क्षम्यताम् ॥
अन्वयः
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(हे) सखे कोक, दिशः तमसा पीयन्ताम्, नीचाः पिशाचाः स्मयम् विदधताम्, शिवाः व्याक्रोशन्तु । असौ कालः कियत् चिरम् स्थास्यति? अद्य भानुः उदेष्यति, अद्य दिशां मुखेषु प्रसादः एष्यति, अद्य मही स्वाम् प्रकृतिम् गमिष्यति । क्षणम् क्षम्यताम् ।
Summary
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O friend, Chakravaka bird, let the directions be swallowed by darkness, let lowly ghouls be arrogant, let jackals howl. How long will this time last? Today the sun will rise, today clarity will come to the faces of the directions, today the earth will return to its nature. Be patient for a moment. This is a message of hope, urging one to endure a dark period, for it is temporary and dawn will surely break.
पदच्छेदः
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| पीयन्तां | पीयन्ताम् (√पा भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | let them be drunk |
| तमसा | तमस् (३.१) | by darkness |
| दिशः | दिश् (१.३) | the directions |
| विदधतां | विदधताम् (वि√धा कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them make |
| नीचाः | नीच (१.३) | lowly |
| पिशाचाः | पिशाच (१.३) | ghosts |
| स्मयं | स्मय (२.१) | pride/arrogance |
| व्याक्रोशन्तु | व्याक्रोशन्तु (वि+आ√क्रुश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them howl |
| शिवाः | शिवा (१.३) | jackals |
| कियत् | कियत् | how |
| चिरम् | चिरम् | long |
| असौ | अदस् (१.१) | this |
| कालः | काल (१.१) | time |
| सखे | सखि (८.१) | O friend |
| स्थास्यति | स्थास्यति (√स्था कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will last |
| अद्य | अद्य | today |
| उदेष्यति | उदेष्यति (उत्√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will rise |
| भानुः | भानु (१.१) | the sun |
| एष्यति | एष्यति (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will come |
| दिशां | दिश् (६.३) | of the directions |
| अद्य | अद्य | today |
| प्रसादः | प्रसाद (१.१) | clarity |
| मुखेषु | मुख (७.३) | on the faces |
| अद्य | अद्य | today |
| स्वां | स्व (२.१) | its own |
| प्रकृतिं | प्रकृति (२.१) | nature |
| गमिष्यति | गमिष्यति (√गम् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will go to |
| मही | मही (१.१) | the earth |
| कोक | कोक (८.१) | O Chakravaka bird |
| क्षणं | क्षण (२.१) | for a moment |
| क्षम्यताम् | क्षम्यताम् (√क्षम् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | be patient |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पी | य | न्तां | त | म | सा | दि | शो | वि | द | ध | तां | नी | चाः | पि | शा | चाः | स्म | यं |
| व्या | क्रो | श | न्तु | शि | वाः | कि | य | च्चि | र | म | सौ | का | लः | स | खे | स्था | स्य | ति |
| अ | द्यो | दे | ष्य | ति | भा | नु | रे | ष्य | ति | दि | शा | म | द्य | प्र | सा | दो | मु | खे |
| ध्व | द्य | स्वां | प्र | कृ | तिं | ग | मि | ष्य | ति | म | ही | को | क | क्ष | णं | क्ष | म्य | ताम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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