राज्यं येन कृतं न तस्य शृणुमः कामस्य नामाधुना
येषामेव गिरः पुरा परभृतैस्तैरद्य मौनं धृतम् ।
व्याप्ता येन दिशो न साम्प्रतमसौ मन्दानिलः स्पन्दते
किं ब्रूमोऽवतरन्निदाघहतको विश्वं नवं निर्ममे ॥
राज्यं येन कृतं न तस्य शृणुमः कामस्य नामाधुना
येषामेव गिरः पुरा परभृतैस्तैरद्य मौनं धृतम् ।
व्याप्ता येन दिशो न साम्प्रतमसौ मन्दानिलः स्पन्दते
किं ब्रूमोऽवतरन्निदाघहतको विश्वं नवं निर्ममे ॥
येषामेव गिरः पुरा परभृतैस्तैरद्य मौनं धृतम् ।
व्याप्ता येन दिशो न साम्प्रतमसौ मन्दानिलः स्पन्दते
किं ब्रूमोऽवतरन्निदाघहतको विश्वं नवं निर्ममे ॥
अन्वयः
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येन राज्यम् कृतम्, तस्य कामस्य नाम अधुना न शृणुमः । पुरा येषाम् एव गिरः (आसन्), तैः परभृतैः अद्य मौनम् धृतम् । येन दिशः व्याप्ताः, असौ मन्दानिलः साम्प्रतम् न स्पन्दते । किम् ब्रूमः, अवतरन् निदाघहतकः विश्वम् नवम् निर्ममे ।
Summary
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We no longer hear the name of Kama, who once ruled. The cuckoos, whose voices were once heard, are now silent. The gentle breeze that once pervaded all directions no longer stirs. What can we say? The descending, wretched summer has created a whole new world. This describes the devastating change brought by a harsh new regime (summer), which has completely erased the glories of the previous era (spring).
पदच्छेदः
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| राज्यं | राज्य (१.१) | kingdom |
| येन | यद् (३.१) | by whom |
| कृतं | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
| न | न | not |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| शृणुमः | शृणुमः (√श्रु कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | we hear |
| कामस्य | काम (६.१) | of Kama (God of Love) |
| नाम | नामन् (२.१) | the name |
| अधुना | अधुना | now |
| येषाम् | यद् (६.३) | whose |
| एव | एव | very |
| गिरः | गिर् (१.३) | voices |
| पुरा | पुरा | before |
| परभृतैः | परभृत (३.३) | by the cuckoos |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| अद्य | अद्य | today |
| मौनं | मौन (२.१) | silence |
| धृतम् | धृत (√धृ+क्त, १.१) | is held |
| व्याप्ताः | व्याप्त (वि√आप्+क्त, १.३) | were pervaded |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| दिशः | दिश् (१.३) | the directions |
| न | न | not |
| साम्प्रतम् | साम्प्रतम् | now |
| असौ | अदस् (१.१) | that |
| मन्दानिलः | मन्द–अनिल (१.१) | gentle breeze |
| स्पन्दते | स्पन्दते (√स्पन्द् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | moves |
| किं | किम् (२.१) | what |
| ब्रूमः | ब्रूमः (√ब्रू कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | can we say |
| अवतरन् | अवतरत् (अव√तॄ+शतृ, १.१) | descending |
| निदाघहतकः | निदाघ–हतक (१.१) | the wretched summer |
| विश्वं | विश्व (२.१) | the world |
| नवं | नव (२.१) | new |
| निर्ममे | निर्ममे (निर्√मा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | has created |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | ज्यं | ये | न | कृ | तं | न | त | स्य | शृ | णु | मः | का | म | स्य | ना | मा | धु | ना |
| ये | षा | मे | व | गि | रः | पु | रा | प | र | भृ | तै | स्तै | र | द्य | मौ | नं | धृ | तम् |
| व्या | प्ता | ये | न | दि | शो | न | सा | म्प्र | त | म | सौ | म | न्दा | नि | लः | स्प | न्द | ते |
| किं | ब्रू | मो | ऽव | त | र | न्नि | दा | घ | ह | त | को | वि | श्वं | न | वं | नि | र्म | मे |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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