वर्णस्तेऽतिमनोरमः शिरसि ते वासो मृडानीपतेः
प्रत्येतव्यतरं च काञ्चनमिति प्रौढं पुनर्नाम ते ।
किं कर्तव्यमितःपरं च भवता धुत्तूर लोकाः पुन-
र्न क्रीणन्ति न च स्पृशन्ति न च वा पश्यन्ति गन्धप्रियाः ॥
वर्णस्तेऽतिमनोरमः शिरसि ते वासो मृडानीपतेः
प्रत्येतव्यतरं च काञ्चनमिति प्रौढं पुनर्नाम ते ।
किं कर्तव्यमितःपरं च भवता धुत्तूर लोकाः पुन-
र्न क्रीणन्ति न च स्पृशन्ति न च वा पश्यन्ति गन्धप्रियाः ॥
प्रत्येतव्यतरं च काञ्चनमिति प्रौढं पुनर्नाम ते ।
किं कर्तव्यमितःपरं च भवता धुत्तूर लोकाः पुन-
र्न क्रीणन्ति न च स्पृशन्ति न च वा पश्यन्ति गन्धप्रियाः ॥
अन्वयः
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(हे) धुत्तूर, ते वर्णः अतिमनोरमः, ते वासः मृडानीपतेः शिरसि, ते नाम पुनः प्रौढम् 'काञ्चनम्' इति च प्रत्येतव्यतरम् । इतःपरम् च भवता किम् कर्तव्यम्? पुनः लोकाः गन्धप्रियाः (त्वाम्) न क्रीणन्ति, न च स्पृशन्ति, न च वा पश्यन्ति ।
Summary
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O Datura flower, your color is beautiful, your abode is on Shiva's head, and you have the great name 'Kanchanam' (golden). What more can be done by you? Yet, people who love fragrance neither buy, touch, nor look at you. This illustrates that high association and a good name are worthless without intrinsic merit (like fragrance). True worth is judged by inherent qualities, not external accolades.
पदच्छेदः
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| वर्णः | वर्ण (१.१) | color |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| अतिमनोरमः | अति–मनोरम (१.१) | is very beautiful |
| शिरसि | शिरस् (७.१) | on the head |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| वासः | वास (१.१) | abode |
| मृडानीपतेः | मृडानी–पति (६.१) | of the husband of Mridani (Shiva) |
| प्रत्येतव्यतरं | प्रत्येतव्यतर (प्रति√इ+तव्यत्+तरप्, १.१) | more trustworthy/famous |
| च | च | and |
| काञ्चनम् | काञ्चन (१.१) | gold |
| इति | इति | as |
| प्रौढं | प्रौढ (१.१) | great |
| पुनः | पुनर् | again |
| नाम | नामन् (१.१) | name |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| किं | किम् (१.१) | what |
| कर्तव्यम् | कर्तव्य (√कृ+तव्यत्, १.१) | is to be done |
| इतःपरं | इतःपरम् | beyond this |
| च | च | and |
| भवता | भवत् (३.१) | by you |
| धुत्तूर | धुत्तूर (८.१) | O Datura flower |
| लोकाः | लोक (१.३) | people |
| पुनः | पुनर् | however |
| न | न | not |
| क्रीणन्ति | क्रीणन्ति (√क्री कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | buy |
| न | न | nor |
| च | च | and |
| स्पृशन्ति | स्पृशन्ति (√स्पृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | touch |
| न | न | nor |
| च | च | and |
| वा | वा | or |
| पश्यन्ति | पश्यन्ति (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | look at |
| गन्धप्रियाः | गन्ध–प्रिय (१.३) | lovers of fragrance |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | र्ण | स्ते | ऽति | म | नो | र | मः | शि | र | सि | ते | वा | सो | मृ | डा | नी | प | तेः |
| प्र | त्ये | त | व्य | त | रं | च | का | ञ्च | न | मि | ति | प्रौ | ढं | पु | न | र्ना | म | ते |
| किं | क | र्त | व्य | मि | तः | प | रं | च | भ | व | ता | धु | त्तू | र | लो | काः | पु | न |
| र्न | क्री | ण | न्ति | न | च | स्पृ | श | न्ति | न | च | वा | प | श्य | न्ति | ग | न्ध | प्रि | याः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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