मेघ द्वारतया विधाय भुवनान्याप्लावस्यम्भसा
चन्द्रं द्वारतया विधाय सवितः पुष्णासि सर्वोषधीः ।
यत्त्वीषत्तपसीव तत्तु कुरुषे स्वेनैव तेनाधुना
दातृत्वं घनचन्द्रयोः परिणतं क्रौर्य तु शिष्टं त्वयि ॥
मेघ द्वारतया विधाय भुवनान्याप्लावस्यम्भसा
चन्द्रं द्वारतया विधाय सवितः पुष्णासि सर्वोषधीः ।
यत्त्वीषत्तपसीव तत्तु कुरुषे स्वेनैव तेनाधुना
दातृत्वं घनचन्द्रयोः परिणतं क्रौर्य तु शिष्टं त्वयि ॥
चन्द्रं द्वारतया विधाय सवितः पुष्णासि सर्वोषधीः ।
यत्त्वीषत्तपसीव तत्तु कुरुषे स्वेनैव तेनाधुना
दातृत्वं घनचन्द्रयोः परिणतं क्रौर्य तु शिष्टं त्वयि ॥
अन्वयः
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(हे) सवितः, मेघम् द्वारतया विधाय भुवनानि अम्भसा आप्लावसि । चन्द्रम् द्वारतया विधाय सर्वोषधीः पुष्णासि । यत् तु ईषत् तपसि इव, तत् तु स्वेन एव कुरुषे । तेन अधुना घनचन्द्रयोः दातृत्वम् परिणतम्, क्रौर्यम् तु त्वयि शिष्टम् ।
Summary
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O Sun, using the cloud as a medium, you flood the worlds with water. Using the moon as a medium, you nourish all herbs. But the little burning you do, you do by yourself. Therefore, the credit for generosity has gone to the cloud and the moon, while the cruelty remains with you. This criticizes a leader who uses intermediaries for good deeds but performs harsh acts directly, thus earning a bad reputation.
पदच्छेदः
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| मेघम् | मेघ (२.१) | the cloud |
| द्वारतया | द्वारता (३.१) | as a medium |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| भुवनानि | भुवन (२.३) | the worlds |
| आप्लावसि | आप्लावसि (आ√प्लु +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you flood |
| अम्भसा | अम्भस् (३.१) | with water |
| चन्द्रं | चन्द्र (२.१) | the moon |
| द्वारतया | द्वारता (३.१) | as a medium |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| सवितः | सवितृ (८.१) | O Sun |
| पुष्णासि | पुष्णासि (√पुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you nourish |
| सर्वोषधीः | सर्व–ओषधि (२.३) | all the herbs |
| यत् | यद् (१.१) | that which |
| तु | तु | but |
| ईषत् | ईषत् | a little |
| तपसि | तपसि (√तप् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you burn/heat |
| इव | इव | as it were |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| तु | तु | however |
| कुरुषे | कुरुषे (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you do |
| स्वेन | स्व (३.१) | by yourself |
| एव | एव | only |
| तेन | तेन | therefore |
| अधुना | अधुना | now |
| दातृत्वं | दातृत्व (१.१) | generosity |
| घनचन्द्रयोः | घन–चन्द्र (६.२) | of the cloud and the moon |
| परिणतं | परिणत (परि√नम्+क्त, १.१) | has resulted in |
| क्रौर्यं | क्रौर्य (१.१) | cruelty |
| तु | तु | but |
| शिष्टं | शिष्ट (√शिष्+क्त, १.१) | remains |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | in you |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मे | घ | द्वा | र | त | या | वि | धा | य | भु | व | ना | न्या | प्ला | व | स्य | म्भ | सा | |
| च | न्द्रं | द्वा | र | त | या | वि | धा | य | स | वि | तः | पु | ष्णा | सि | स | र्वो | ष | धीः |
| य | त्त्वी | ष | त्त | प | सी | व | त | त्तु | कु | रु | षे | स्वे | नै | व | ते | ना | धु | ना |
| दा | तृ | त्वं | घ | न | च | न्द्र | योः | प | रि | ण | तं | क्रौ | र्य | तु | शि | ष्टं | त्व | यि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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