भोज्यं स्वादु पयः स्थितिमणिगणैरापिञ्जरे पञ्जरे
दूरे चिन्तयितुं च दंशमशकाः पारे गिरां लालनम् ।
सत्यं सर्वमथापि काननभुवि स्वाच्छन्द्यमव्याहतं
ध्यायन्ती विमना मनागपि शुकी नालम्बते निर्वृतिम् ॥
भोज्यं स्वादु पयः स्थितिमणिगणैरापिञ्जरे पञ्जरे
दूरे चिन्तयितुं च दंशमशकाः पारे गिरां लालनम् ।
सत्यं सर्वमथापि काननभुवि स्वाच्छन्द्यमव्याहतं
ध्यायन्ती विमना मनागपि शुकी नालम्बते निर्वृतिम् ॥
दूरे चिन्तयितुं च दंशमशकाः पारे गिरां लालनम् ।
सत्यं सर्वमथापि काननभुवि स्वाच्छन्द्यमव्याहतं
ध्यायन्ती विमना मनागपि शुकी नालम्बते निर्वृतिम् ॥
अन्वयः
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भोज्यम् स्वादु पयः, स्थितिः मणिगणैः आपिञ्जरे पञ्जरे, दंशमशकाः दूरे चिन्तयितुम् च, लालनम् गिराम् पारे । सर्वम् सत्यम्, तथा अपि काननभुवि अव्याहतम् स्वाच्छन्द्यम् ध्यायन्ती शुकी मनाक् अपि विमनाः निर्वृतिम् न आलम्बते ।
Summary
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The food is tasty milk, the stay is in a golden cage adorned with gems, gadflies and mosquitoes are far from thought, and the caressing is beyond words. All this is true, yet the female parrot, dejected while remembering the unhindered freedom of the forest, does not attain even a little happiness. This shows that no amount of material comfort can replace the value of freedom.
पदच्छेदः
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| भोज्यं | भोज्य (√भुज्+ण्यत्, १.१) | food |
| स्वादु | स्वादु (१.१) | is tasty |
| पयः | पयस् (१.१) | milk |
| स्थितिः | स्थिति (१.१) | stay |
| मणिगणैः | मणि–गण (३.३) | with multitudes of gems |
| आपिञ्जरे | आपिञ्जर (७.१) | golden |
| पञ्जरे | पञ्जर (७.१) | in a cage |
| दूरे | दूर (७.१) | far away |
| चिन्तयितुं | चिन्तयितुम् (√चिन्त्+तुमुन्) | to think of |
| च | च | and |
| दंशमशकाः | दंश–मशक (१.३) | gadflies and mosquitoes |
| पारे | पार (७.१) | beyond |
| गिरां | गिर् (६.३) | of words |
| लालनम् | लालन (१.१) | caressing |
| सत्यं | सत्य (१.१) | is true |
| सर्वम् | सर्व (१.१) | all this |
| अथ | अथ | but |
| अपि | अपि | yet |
| काननभुवि | कानन–भू (७.१) | in the forest land |
| स्वाच्छन्द्यम् | स्वाच्छन्द्य (२.१) | freedom |
| अव्याहतं | अव्याहत (आ+वि√हन्+क्त, २.१) | unhindered |
| ध्यायन्ती | ध्यायन्ती (√ध्यै+शतृ+ङीप्, १.१) | remembering |
| विमना | विमनस् (१.१) | dejected |
| मनाक् | मनाक् | even a little |
| अपि | अपि | even |
| शुकी | शुक (१.१) | the female parrot |
| न | न | not |
| आलम्बते | आलम्बते (आ√लम्ब् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | attains |
| निर्वृतिम् | निर्वृति (२.१) | happiness |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भो | ज्यं | स्वा | दु | प | यः | स्थि | ति | म | णि | ग | णै | रा | पि | ञ्ज | रे | प | ञ्ज | रे |
| दू | रे | चि | न्त | यि | तुं | च | दं | श | म | श | काः | पा | रे | गि | रां | ला | ल | नम् |
| स | त्यं | स | र्व | म | था | पि | का | न | न | भु | वि | स्वा | च्छ | न्द्य | म | व्या | ह | तं |
| ध्या | य | न्ती | वि | म | ना | म | ना | ग | पि | शु | की | ना | ल | म्ब | ते | नि | र्वृ | तिम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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