चूताः पल्लवमुद्रिन्ति वितरन्त्येतत्पिकेभ्यस्तत-
स्तेऽप्येतेन कुहूः कुहूरिति कलं कुर्वन्ति कूजामिति ।
निम्बोऽपि स्वयमुद्गिरन्फलमनेनाराधयन्वायसा-
न्किचित्तेषु ततो रटत्सु सफलं जन्म स्वकं मन्यते ॥
चूताः पल्लवमुद्रिन्ति वितरन्त्येतत्पिकेभ्यस्तत-
स्तेऽप्येतेन कुहूः कुहूरिति कलं कुर्वन्ति कूजामिति ।
निम्बोऽपि स्वयमुद्गिरन्फलमनेनाराधयन्वायसा-
न्किचित्तेषु ततो रटत्सु सफलं जन्म स्वकं मन्यते ॥
स्तेऽप्येतेन कुहूः कुहूरिति कलं कुर्वन्ति कूजामिति ।
निम्बोऽपि स्वयमुद्गिरन्फलमनेनाराधयन्वायसा-
न्किचित्तेषु ततो रटत्सु सफलं जन्म स्वकं मन्यते ॥
अन्वयः
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चूताः पल्लवम् उद्गिरन्ति, ततः एतत् पिकेभ्यः वितरन्ति । ते अपि एतेन 'कुहूः कुहूः' इति कलम् कूजाम् कुर्वन्ति । निम्बः अपि स्वयम् फलम् उद्गिरन्, अनेन वायसान् आराधयन्, ततः तेषु किञ्चित् रटत्सु स्वकम् जन्म सफलम् मन्यते ।
Summary
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Mango trees put forth sprouts and offer them to the cuckoos, who then use them to sing their sweet 'kuhu kuhu'. The Nimba tree, also producing its fruit and pleasing the crows with it, considers its own life fulfilled when they caw a little. This illustrates that even the lowly find satisfaction in their creations being appreciated, regardless of the quality of the appreciation or the appreciator.
पदच्छेदः
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| चूताः | चूत (१.३) | mango trees |
| पल्लवम् | पल्लव (२.१) | sprouts |
| उद्गिरन्ति | उद्गिरन्ति (उत्√गॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | put forth |
| वितरन्ति | वितरन्ति (वि√तॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they distribute |
| एतत् | एतद् (२.१) | this |
| पिकेभ्यः | पिक (४.३) | to the cuckoos |
| ततः | ततः | then |
| ते | तद् (१.३) | they |
| अपि | अपि | also |
| एतेन | एतद् (३.१) | with this |
| कुहूः | कुहूः | kuhu |
| कुहूः | कुहूः | kuhu |
| इति | इति | thus |
| कलम् | कल (२.१) | sweet |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | make |
| कूजाम् | कूजा (२.१) | warbling |
| इति | इति | thus |
| निम्बः | निम्ब (१.१) | the Nimba tree |
| अपि | अपि | also |
| स्वयम् | स्वयम् | itself |
| उद्गिरन् | उद्गिरत् (उत्√गॄ+शतृ, १.१) | producing |
| फलम् | फल (२.१) | fruit |
| अनेन | इदम् (३.१) | with this |
| आराधयन् | आराधयत् (आ√राध्+णिच्+शतृ, १.१) | pleasing |
| वायसान् | वायस (२.३) | crows |
| किञ्चित् | किञ्चित् | a little |
| तेषु | तद् (७.३) | they |
| ततः | ततः | then |
| रटत्सु | रटत् (√रट्+शतृ, ७.३) | cawing |
| सफलम् | सफल (२.१) | fruitful |
| जन्म | जन्मन् (२.१) | life |
| स्वकम् | स्वक (२.१) | its own |
| मन्यते | मन्यते (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | considers |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चू | ताः | प | ल्ल | व | मु | द्रि | न्ति | वि | त | र | न्त्ये | त | त्पि | के | भ्य | स्त | त | |
| स्ते | ऽप्ये | ते | न | कु | हूः | कु | हू | रि | ति | क | लं | कु | र्व | न्ति | कू | जा | मि | ति |
| नि | म्बो | ऽपि | स्व | य | मु | द्गि | र | न्फ | ल | म | ने | ना | रा | ध | य | न्वा | य | सा |
| न्कि | चि | त्ते | षु | त | तो | र | ट | त्सु | स | फ | लं | ज | न्म | स्व | कं | म | न्य | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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