तिक्तास्ते विटपास्त्वचो यदि ततस्तिक्तास्ततोऽपि च्छदा-
स्तेभ्योऽपि प्रसवास्ततोऽपि च फलान्येवं न दृष्टं क्वचित् ।
स्तौमि त्वामथ वा न निम्ब भवतोऽप्यासीद्यतः सम्भवः
श्रीमत्तत्किल निम्बबीजमवनौ स्तुत्यं वचःशालिनाम् ॥
तिक्तास्ते विटपास्त्वचो यदि ततस्तिक्तास्ततोऽपि च्छदा-
स्तेभ्योऽपि प्रसवास्ततोऽपि च फलान्येवं न दृष्टं क्वचित् ।
स्तौमि त्वामथ वा न निम्ब भवतोऽप्यासीद्यतः सम्भवः
श्रीमत्तत्किल निम्बबीजमवनौ स्तुत्यं वचःशालिनाम् ॥
स्तेभ्योऽपि प्रसवास्ततोऽपि च फलान्येवं न दृष्टं क्वचित् ।
स्तौमि त्वामथ वा न निम्ब भवतोऽप्यासीद्यतः सम्भवः
श्रीमत्तत्किल निम्बबीजमवनौ स्तुत्यं वचःशालिनाम् ॥
अन्वयः
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यदि त्वचः तिक्ताः, ततः विटपाः तिक्ताः, ततः अपि छदाः, तेभ्यः अपि प्रसवाः, ततः अपि च फलानि (तिक्तानि), एवम् क्वचित् न दृष्टम् । अथ वा, हे निम्ब, त्वाम् स्तौमि, यतः भवतः अपि सम्भवः आसीत्, तत् श्रीमत् निम्बबीजम् किल अवनौ वचःशालिनाम् स्तुत्यम् ।
Summary
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It is not seen anywhere that if the bark is bitter, then the branches are bitter, then the leaves, then the blossoms, and then the fruits. Or rather, O Nimba tree, I do not praise you, but that glorious Nimba seed from which even you originated. Indeed, on this earth, that seed is what should be praised by the eloquent. The source of a lineage, not its flawed descendants, deserves the real praise.
पदच्छेदः
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| तिक्ताः | तिक्त (१.१) | are bitter |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| विटपाः | विटप (१.३) | branches |
| त्वचः | त्वच् (१.३) | barks |
| यदि | यदि | if |
| ततः | ततः | from that |
| तिक्ताः | तिक्त (१.३) | are bitter |
| ततः | ततः | from that |
| अपि | अपि | also |
| छदाः | छद (१.३) | leaves |
| तेभ्यः | तद् (५.३) | from them |
| अपि | अपि | also |
| प्रसवाः | प्रसव (१.३) | blossoms |
| ततः | ततः | from that |
| अपि | अपि | also |
| च | च | and |
| फलानि | फल (१.३) | fruits |
| एवं | एवम् | thus |
| न | न | not |
| दृष्टं | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.१) | seen |
| क्वचित् | क्वचित् | anywhere |
| स्तौमि | स्तौमि (√स्तु कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I praise |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| अथ वा | अथ वा | or rather |
| न | न | not |
| निम्ब | निम्ब (८.१) | O Nimba tree |
| भवतः | भवत् (६.१) | your |
| अपि | अपि | even |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| यतः | यतः | from which |
| सम्भवः | सम्भव (१.१) | origin |
| श्रीमत् | श्रीमत् (१.१) | glorious |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| किल | किल | indeed |
| निम्बबीजम् | निम्ब–बीज (१.१) | Nimba seed |
| अवनौ | अवनि (७.१) | on earth |
| स्तुत्यं | स्तुत्य (√स्तु+यत्, १.१) | is to be praised |
| वचःशालिनाम् | वचस्–शालिन् (६.३) | by the eloquent |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ति | क्ता | स्ते | वि | ट | पा | स्त्व | चो | य | दि | त | त | स्ति | क्ता | स्त | तो | ऽपि | च्छ | दा |
| स्ते | भ्यो | ऽपि | प्र | स | वा | स्त | तो | ऽपि | च | फ | ला | न्ये | वं | न | दृ | ष्टं | क्व | चित् |
| स्तौ | मि | त्वा | म | थ | वा | न | नि | म्ब | भ | व | तो | ऽप्या | सी | द्य | तः | स | म्भ | वः |
| श्री | म | त्त | त्कि | ल | नि | म्ब | बी | ज | म | व | नौ | स्तु | त्यं | व | चः | शा | लि | नाम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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