उत्सन्नो मधुरस्ति कोकिलरवैरुत्सन्नमस्त्येतद-
प्युत्सन्नं मलयानिलैरिदमपि प्रागेव जानीमहे ।
पान्थास्तुष्यथ तावतैव किमिति भ्रान्ता यदि प्राणिति
स्तोकेनापि मनोभवो गलतु वः प्राणेषु शुष्को ग्रहः ॥
उत्सन्नो मधुरस्ति कोकिलरवैरुत्सन्नमस्त्येतद-
प्युत्सन्नं मलयानिलैरिदमपि प्रागेव जानीमहे ।
पान्थास्तुष्यथ तावतैव किमिति भ्रान्ता यदि प्राणिति
स्तोकेनापि मनोभवो गलतु वः प्राणेषु शुष्को ग्रहः ॥
प्युत्सन्नं मलयानिलैरिदमपि प्रागेव जानीमहे ।
पान्थास्तुष्यथ तावतैव किमिति भ्रान्ता यदि प्राणिति
स्तोकेनापि मनोभवो गलतु वः प्राणेषु शुष्को ग्रहः ॥
अन्वयः
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मधुरः उत्सन्नः अस्ति, कोकिलरवैः एतत् अपि उत्सन्नम् अस्ति, मलयानिलैः इदम् अपि उत्सन्नम्, (इति) प्राक् एव जानीमहे । पान्थाः, तावता एव तुष्यथ किम् इति? यदि मनोभवः स्तोकेन अपि प्राणिति (तर्हि) भ्रान्ताः (स्थ) । वः प्राणेषु शुष्कः ग्रहः गलतु ।
Summary
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We already know that Spring is ruined, as are the cuckoo's calls and the Malaya breezes. O travelers, why are you satisfied with just that? You are mistaken if you think the God of Love (Kamadeva) survives even a little. Let go of your vain insistence on life (and love's pleasures). This suggests that in times of devastation, one should not cling to false hopes based on remnants of past joys.
पदच्छेदः
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| उत्सन्नः | उत्सन्न (उत्√सद्+क्त, १.१) | is ruined |
| मधुरः | मधुर (१.१) | Spring |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| कोकिलरवैः | कोकिल–रव (३.३) | by the cuckoos' calls |
| उत्सन्नम् | उत्सन्न (उत्√सद्+क्त, १.१) | is ruined |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| अपि | अपि | also |
| उत्सन्नं | उत्सन्न (उत्√सद्+क्त, १.१) | is ruined |
| मलयानिलैः | मलय–अनिल (३.३) | by the Malaya breezes |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| अपि | अपि | also |
| प्राक् | प्राच् | already |
| एव | एव | indeed |
| जानीमहे | जानीमहे (√ज्ञा कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. बहु.) | we know |
| पान्थाः | पथिन् (८.३) | O travelers |
| तुष्यथ | तुष्यथ (√तुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | are you satisfied |
| तावता | तावत् (३.१) | by that much |
| एव | एव | only |
| किम् | किम् | why |
| इति | इति | thus |
| भ्रान्ताः | भ्रान्त (√भ्रम्+क्त, १.३) | are you mistaken |
| यदि | यदि | if |
| प्राणिति | प्राणिति (प्र√अन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | breathes/lives |
| स्तोकेन | स्तोक (३.१) | with a little |
| अपि | अपि | even |
| मनोभवः | मनस्–भू (१.१) | the mind-born (Kamadeva) |
| गलतु | गलतु (√गल् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it fall away |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
| प्राणेषु | प्राण (७.३) | for life |
| शुष्कः | शुष्क (१.१) | dry/vain |
| ग्रहः | ग्रह (१.१) | insistence |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्स | न्नो | म | धु | र | स्ति | को | कि | ल | र | वै | रु | त्स | न्न | म | स्त्ये | त | द |
| प्यु | त्स | न्नं | म | ल | या | नि | लै | रि | द | म | पि | प्रा | गे | व | जा | नी | म | हे |
| पा | न्था | स्तु | ष्य | थ | ता | व | तै | व | कि | मि | ति | भ्रा | न्ता | य | दि | प्रा | णि | ति |
| स्तो | के | ना | पि | म | नो | भ | वो | ग | ल | तु | वः | प्रा | णे | षु | शु | ष्को | ग्र | हः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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