सर्वत्र स्रवतोऽस्य किञ्चिदुदकं दिष्ट्या मुहूर्ते क्वचि-
च्छुक्तीनामुदरेषु मौक्तिकमभूत्काले कदाचित्किल ।
अद्यत्वेऽपि तथा करोतु पटुता यद्यस्ति तद्धूरतः
शुष्कैरेव तु गर्जितैर्व्यथयति श्रोत्राणि धाराधरः ॥
सर्वत्र स्रवतोऽस्य किञ्चिदुदकं दिष्ट्या मुहूर्ते क्वचि-
च्छुक्तीनामुदरेषु मौक्तिकमभूत्काले कदाचित्किल ।
अद्यत्वेऽपि तथा करोतु पटुता यद्यस्ति तद्धूरतः
शुष्कैरेव तु गर्जितैर्व्यथयति श्रोत्राणि धाराधरः ॥
च्छुक्तीनामुदरेषु मौक्तिकमभूत्काले कदाचित्किल ।
अद्यत्वेऽपि तथा करोतु पटुता यद्यस्ति तद्धूरतः
शुष्कैरेव तु गर्जितैर्व्यथयति श्रोत्राणि धाराधरः ॥
अन्वयः
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सर्वत्र स्रवतः अस्य (धाराधरस्य) किञ्चित् उदकम्, दिष्ट्या कदाचित् काले क्वचित् मुहूर्ते शुक्तीनाम् उदरेषु मौक्तिकम् अभूत् किल। यदि पटुता अस्ति, (तर्हि) अद्यत्वे अपि तथा करोतु। तत् धूरतः। (सः) धाराधरः तु शुष्कैः गर्जितैः एव श्रोत्राणि व्यथयति।
Summary
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They say that once upon a time, by luck, at some auspicious moment, a little water from this ever-flowing cloud became a pearl in the belly of an oyster. If it has such skill, let it do so now as well. But that is far from happening. The cloud only pains the ears with its dry thundering.
पदच्छेदः
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| सर्वत्र | सर्वत्र | everywhere |
| स्रवतः | स्रवत् (√स्रु+शतृ, ६.१) | of it which flows |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| किञ्चित् | किञ्चित् (१.१) | some |
| उदकम् | उदक (१.१) | water |
| दिष्ट्या | दिष्ट्या | by luck |
| मुहूर्ते | मुहूर्त (७.१) | at a moment |
| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| शुक्तीनाम् | शुक्ति (६.३) | of oysters |
| उदरेषु | उदर (७.३) | in the bellies |
| मौक्तिकम् | मौक्तिक (१.१) | a pearl |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| काले | काल (७.१) | in time |
| कदाचित् | कदाचित् | once |
| किल | किल | so they say |
| अद्यत्वे | अद्यत्व (७.१) | nowadays |
| अपि | अपि | also |
| तथा | तथा | so |
| करोतु | करोतु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it do |
| पटुता | पटुता (१.१) | skill |
| यदि | यदि | if |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| धूरतः | धूरतस् | is far from |
| शुष्कैः | शुष्क (३.३) | with dry |
| एव | एव | only |
| तु | तु | but |
| गर्जितैः | गर्जित (३.३) | thunders |
| व्यथयति | व्यथयति (√व्यथ् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it pains |
| श्रोत्राणि | श्रोत्र (२.३) | the ears |
| धाराधरः | धाराधर (१.१) | the cloud |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्व | त्र | स्र | व | तो | ऽस्य | कि | ञ्चि | दु | द | कं | दि | ष्ट्या | मु | हू | र्ते | क्व | चि |
| च्छु | क्ती | ना | मु | द | रे | षु | मौ | क्ति | क | म | भू | त्का | ले | क | दा | चि | त्कि | ल |
| अ | द्य | त्वे | ऽपि | त | था | क | रो | तु | प | टु | ता | य | द्य | स्ति | त | द्धू | र | तः |
| शु | ष्कै | रे | व | तु | ग | र्जि | तै | र्व्य | थ | य | ति | श्रो | त्रा | णि | धा | रा | ध | रः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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