दृष्टाश्चन्द्रसमुद्गमाः शतमतिक्रान्ताः शतं प्रावृषः
सीमामेष न जात्वलङ्घत किलेत्यब्धिर्न विश्वस्यताम् ।
योऽसौ शेत इवायमेव विधिना वामेन चेच्चाल्यते
का सीमेति तदास्ति के जनपदाः का मेदिनी का दिशः ॥
दृष्टाश्चन्द्रसमुद्गमाः शतमतिक्रान्ताः शतं प्रावृषः
सीमामेष न जात्वलङ्घत किलेत्यब्धिर्न विश्वस्यताम् ।
योऽसौ शेत इवायमेव विधिना वामेन चेच्चाल्यते
का सीमेति तदास्ति के जनपदाः का मेदिनी का दिशः ॥
सीमामेष न जात्वलङ्घत किलेत्यब्धिर्न विश्वस्यताम् ।
योऽसौ शेत इवायमेव विधिना वामेन चेच्चाल्यते
का सीमेति तदास्ति के जनपदाः का मेदिनी का दिशः ॥
अन्वयः
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शतम् चन्द्र-समुद्गमाः दृष्टाः, शतम् प्रावृषः अतिक्रान्ताः। 'एषः जातु सीमाम् न अलङ्घत किल' इति अब्धिः न विश्वस्यताम्। यः असौ शेते इव (दृश्यते), अयम् एव चेत् वामेन विधिना चाल्यते, तदा का सीमा अस्ति? के जनपदाः (सन्ति)? का मेदिनी (अस्ति)? का दिशः (सन्ति)?
Summary
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A hundred moonrises have been seen, a hundred monsoons have passed. Do not trust the ocean thinking, "It has never transgressed its boundary." If this very ocean, which seems as if it is sleeping, is stirred by an adverse fate, then what boundary will remain? What lands, what earth, what directions will there be?
पदच्छेदः
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| दृष्टाः | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.३) | have been seen |
| चन्द्रसमुद्गमाः | चन्द्र–समुद्गम (१.३) | moonrises |
| शतम् | शत (१.१) | a hundred |
| अतिक्रान्ताः | अतिक्रान्त (अति√क्रम्+क्त, १.३) | have passed |
| शतम् | शत (१.१) | a hundred |
| प्रावृषः | प्रावृष् (१.३) | monsoons |
| सीमाम् | सीमन् (२.१) | the boundary |
| एषः | एतद् (१.१) | this (ocean) |
| न | न | not |
| जातु | जातु | ever |
| अलङ्घत | अलङ्घत (√लङ्घ् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | transgressed |
| किल | किल | so they say |
| इति | इति | thus |
| अब्धिः | अब्धि (१.१) | the ocean |
| न | न | not |
| विश्वस्यताम् | विश्वस्यताम् (वि√श्वस् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should be trusted |
| यः | यद् (१.१) | which |
| असौ | अदस् (१.१) | that |
| शेते | शेते (√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | sleeps |
| इव | इव | as if |
| अयम् | इदम् (१.१) | this very one |
| एव | एव | indeed |
| विधिना | विधि (३.१) | by fate |
| वामेन | वाम (३.१) | adverse |
| चेत् | चेत् | if |
| चाल्यते | चाल्यते (√चल् +णिच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is stirred |
| का | किम् (१.१) | what |
| सीमा | सीमन् (१.१) | boundary |
| इति | इति | then |
| तदा | तदा | then |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is there |
| के | किम् (१.३) | what |
| जनपदाः | जनपद (१.३) | lands |
| का | किम् (१.१) | what |
| मेदिनी | मेदिनी (१.१) | earth |
| का | किम् (१.१) | what |
| दिशः | दिश् (१.३) | directions |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ष्टा | श्च | न्द्र | स | मु | द्ग | माः | श | त | म | ति | क्रा | न्ताः | श | तं | प्रा | वृ | षः |
| सी | मा | मे | ष | न | जा | त्व | ल | ङ्घ | त | कि | ले | त्य | ब्धि | र्न | वि | श्व | स्य | ताम् |
| यो | ऽसौ | शे | त | इ | वा | य | मे | व | वि | धि | ना | वा | मे | न | चे | च्चा | ल्य | ते |
| का | सी | मे | ति | त | दा | स्ति | के | ज | न | प | दाः | का | मे | दि | नी | का | दि | शः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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