द्यौरित्थं क्षितिरित्थमित्थमुदधेर्मुद्रेति कृत्वा स्थितिं
विश्वस्याहनि विश्रमाय शयितुं प्रारम्भि धात्रा यदा ।
दग्धं चण्डकरैस्तदैव पवनैरौत्पातिकैः शोषितं
मेघैः प्लावितमद्भुतैरपि जगत्स्रष्टव्यमासीत्पुनः ॥
द्यौरित्थं क्षितिरित्थमित्थमुदधेर्मुद्रेति कृत्वा स्थितिं
विश्वस्याहनि विश्रमाय शयितुं प्रारम्भि धात्रा यदा ।
दग्धं चण्डकरैस्तदैव पवनैरौत्पातिकैः शोषितं
मेघैः प्लावितमद्भुतैरपि जगत्स्रष्टव्यमासीत्पुनः ॥
विश्वस्याहनि विश्रमाय शयितुं प्रारम्भि धात्रा यदा ।
दग्धं चण्डकरैस्तदैव पवनैरौत्पातिकैः शोषितं
मेघैः प्लावितमद्भुतैरपि जगत्स्रष्टव्यमासीत्पुनः ॥
अन्वयः
AI
यदा धात्रा 'द्यौः इत्थम्, क्षितिः इत्थम्, उदधेः मुद्रा इत्थम्' इति विश्वस्य स्थितिम् कृत्वा, अहनि विश्रमाय शयितुम् प्रारम्भि, तदा एव जगत् चण्डकरैः दग्धम्, औत्पातिकैः पवनैः शोषितम्, अद्भुतैः मेघैः अपि प्लावितम् (अभूत्)। (अतः तत्) पुनः स्रष्टव्यम् आसीत्।
Summary
AI
When the Creator, having established the order of the universe—"the sky thus, the earth thus, the ocean's boundary thus"—began to sleep for rest during his day, at that very moment the world was burnt by the sun, dried by calamitous winds, and also flooded by strange clouds. The world had to be created all over again.
पदच्छेदः
AI
| द्यौः | द्यो (१.१) | the sky |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| क्षितिः | क्षिति (१.१) | the earth |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| उदधेः | उदधि (६.१) | of the ocean |
| मुद्रा | मुद्रा (१.१) | the boundary |
| इति | इति | thus |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having established |
| स्थितिम् | स्थिति (२.१) | the order |
| विश्वस्य | विश्व (६.१) | of the universe |
| अहनि | अहन् (७.१) | during the day |
| विश्रमाय | विश्राम (४.१) | for rest |
| शयितुम् | शयितुम् (√शी+तुमुन्) | to sleep |
| प्रारम्भि | प्रारम्भि (प्र+आ√रभ् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was begun |
| धात्रा | धातृ (३.१) | by the Creator |
| यदा | यदा | when |
| दग्धम् | दग्ध (√दह्+क्त, १.१) | was burnt |
| चण्डकरैः | चण्डकर (३.३) | by the fierce-rayed (sun) |
| तदैव | तदैव | at that very moment |
| पवनैः | पवन (३.३) | by winds |
| औत्पातिकैः | औत्पातिक (३.३) | calamitous |
| शोषितम् | शोषित (√शुष्+णिच्+क्त, १.१) | was dried up |
| मेघैः | मेघ (३.३) | by clouds |
| प्लावितम् | प्लावित (√प्लु+णिच्+क्त, १.१) | was flooded |
| अद्भुतैः | अद्भुत (३.३) | strange |
| अपि | अपि | also |
| जगत् | जगत् (१.१) | the world |
| स्रष्टव्यम् | स्रष्टव्य (√सृज्+तव्यत्, १.१) | had to be created |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it |
| पुनः | पुनर् | again |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्यौ | रि | त्थं | क्षि | ति | रि | त्थ | मि | त्थ | मु | द | धे | र्मु | द्रे | ति | कृ | त्वा | स्थि | तिं |
| वि | श्व | स्या | ह | नि | वि | श्र | मा | य | श | यि | तुं | प्रा | र | म्भि | धा | त्रा | य | दा |
| द | ग्धं | च | ण्ड | क | रै | स्त | दै | व | प | व | नै | रौ | त्पा | ति | कैः | शो | षि | तं |
| मे | घैः | प्ला | वि | त | म | द्भु | तै | र | पि | ज | ग | त्स्र | ष्ट | व्य | मा | सी | त्पु | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.