श्वानः सन्त्यभितोऽपि दन्तमुकुलव्यावर्तनोत्पाटित-
स्वैरोत्तानितविड्वराहपृथुकाः किं तैः स्थितैर्वा मृतैः ।
वस्तव्यं गिरिराजमौलिषु विहर्तव्यं पुनः स्वेच्छया
हन्तव्याः करिणो मृगेन्द्र इति च प्राप्तव्यमुच्चैर्यशः ॥
श्वानः सन्त्यभितोऽपि दन्तमुकुलव्यावर्तनोत्पाटित-
स्वैरोत्तानितविड्वराहपृथुकाः किं तैः स्थितैर्वा मृतैः ।
वस्तव्यं गिरिराजमौलिषु विहर्तव्यं पुनः स्वेच्छया
हन्तव्याः करिणो मृगेन्द्र इति च प्राप्तव्यमुच्चैर्यशः ॥
स्वैरोत्तानितविड्वराहपृथुकाः किं तैः स्थितैर्वा मृतैः ।
वस्तव्यं गिरिराजमौलिषु विहर्तव्यं पुनः स्वेच्छया
हन्तव्याः करिणो मृगेन्द्र इति च प्राप्तव्यमुच्चैर्यशः ॥
अन्वयः
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दन्तमुकुलव्यावर्तन-उत्पाटित-स्वैर-उत्तानित-विड्वराहपृथुकाः श्वानः अभितः अपि सन्ति। तैः स्थितैः वा मृतैः किम्? गिरिराजमौलिषु वस्तव्यम्, पुनः स्वेच्छया विहर्तव्यम्, करिणः हन्तव्याः, च मृगेन्द्रः इति उच्चैः यशः प्राप्तव्यम्।
Summary
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There are dogs all around, who can tear apart young boars with their teeth. But what is the use of them, whether they are alive or dead? One should live on the peaks of great mountains, roam at will, kill elephants, and thus obtain the high fame of being a "Lion, the king of beasts."
पदच्छेदः
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| श्वानः | श्वन् (१.३) | dogs |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are |
| अभितः | अभितः | all around |
| अपि | अपि | also |
| दन्तमुकुलव्यावर्तनोत्पाटितस्वैरोत्तानितविड्वराहपृथुकाः | दन्त–मुकुल–व्यावर्तन–उत्पाटित (उद्√पट्+णिच्+क्त)–स्वैर–उत्तानित (उद्√तन्+क्त)–विड्वराह–पृथुक (१.३) | who tear up and lay on their backs at will the young of filthy boars by turning their tooth-buds |
| किम् | किम् (१.१) | what (use) |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| स्थितैः | स्थित (√स्था+क्त, ३.३) | living |
| वा | वा | or |
| मृतैः | मृत (√मृ+क्त, ३.३) | dead |
| वस्तव्यम् | वस्तव्य (√वस्+तव्यत्, १.१) | one should live |
| गिरिराजमौलिषु | गिरि–राज–मौलि (७.३) | on the peaks of the king of mountains |
| विहर्तव्यम् | विहर्तव्य (वि√हृ+तव्यत्, १.१) | one should roam |
| पुनः | पुनर् | again |
| स्वेच्छया | स्व–इच्छा (३.१) | at will |
| हन्तव्याः | हन्तव्य (√हन्+तव्यत्, १.३) | should be killed |
| करिणः | करिन् (१.३) | elephants |
| मृगेन्द्रः | मृग–इन्द्र (१.१) | king of beasts (lion) |
| इति | इति | thus |
| च | च | and |
| प्राप्तव्यम् | प्राप्तव्य (प्र√आप्+तव्यत्, १.१) | should be obtained |
| उच्चैः | उच्चैस् | high |
| यशः | यशस् (१.१) | fame |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्वा | नः | स | न्त्य | भि | तो | ऽपि | द | न्त | मु | कु | ल | व्या | व | र्त | नो | त्पा | टि | त |
| स्वै | रो | त्ता | नि | त | वि | ड्व | रा | ह | पृ | थु | काः | किं | तैः | स्थि | तै | र्वा | मृ | तैः |
| व | स्त | व्यं | गि | रि | रा | ज | मौ | लि | षु | वि | ह | र्त | व्यं | पु | नः | स्वे | च्छ | या |
| ह | न्त | व्याः | क | रि | णो | मृ | गे | न्द्र | इ | ति | च | प्रा | प्त | व्य | मु | च्चै | र्य | शः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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