छायावृक्षमुपाश्रयन्ति पथिषु श्रान्ता हि पान्थाः समं
तेष्वेकोऽस्य शुभं शुभेन मनसा हृष्यन्ननुध्यायति ।
अन्यो हर्तुमपेक्षतेऽस्य विटपानाधारयष्टेः कृते
कश्चिनिश्चिनुते कवाटफलकं कर्तुं तमेव क्षणात् ॥
छायावृक्षमुपाश्रयन्ति पथिषु श्रान्ता हि पान्थाः समं
तेष्वेकोऽस्य शुभं शुभेन मनसा हृष्यन्ननुध्यायति ।
अन्यो हर्तुमपेक्षतेऽस्य विटपानाधारयष्टेः कृते
कश्चिनिश्चिनुते कवाटफलकं कर्तुं तमेव क्षणात् ॥
तेष्वेकोऽस्य शुभं शुभेन मनसा हृष्यन्ननुध्यायति ।
अन्यो हर्तुमपेक्षतेऽस्य विटपानाधारयष्टेः कृते
कश्चिनिश्चिनुते कवाटफलकं कर्तुं तमेव क्षणात् ॥
अन्वयः
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हि श्रान्ताः पान्थाः पथिषु छायावृक्षम् समम् उपाश्रयन्ति। तेषु एकः शुभेन मनसा हृष्यन् अस्य शुभम् अनुध्यायति। अन्यः आधारयष्टेः कृते अस्य विटपान् हर्तुम् अपेक्षते। कश्चित् तम् एव क्षणात् कवाटफलकम् कर्तुम् निश्चिनुते।
Summary
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Tired travelers on their paths equally take shelter under a shade-giving tree. Among them, one, rejoicing with a good heart, wishes it well. Another desires to take its branches for a support stick. Yet another decides in a moment to make a door panel out of the very same tree.
पदच्छेदः
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| छायावृक्षम् | छाया–वृक्ष (२.१) | a shade-giving tree |
| उपाश्रयन्ति | उपाश्रयन्ति (उप+आ√श्रि कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they resort to |
| पथिषु | पथिन् (७.३) | on the paths |
| श्रान्ताः | श्रान्त (√श्रम्+क्त, १.३) | tired |
| हि | हि | indeed |
| पान्थाः | पथिन् (१.३) | travelers |
| समम् | समम् | equally |
| तेषु | तद् (७.३) | among them |
| एकः | एक (१.१) | one |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| शुभम् | शुभ (२.१) | well-being |
| शुभेण | शुभ (३.१) | with a good |
| मनसा | मनस् (३.१) | mind |
| हृष्यन् | हृष्यत् (√हृष्+शतृ, १.१) | rejoicing |
| अनुध्यायति | अनुध्यायति (अनु√ध्यै कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | thinks of |
| अन्यः | अन्य (१.१) | another |
| हर्तुम् | हर्तुम् (√हृ+तुमुन्) | to take away |
| अपेक्षते | अपेक्षते (अप√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | desires |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| विटपान् | विटप (२.३) | branches |
| आधारयष्टेः | आधार–यष्टि (४.१) | for a support-stick |
| कृते | कृते | for the sake of |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) | someone |
| निश्चिनुते | निश्चिनुते (निस्√चि कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | decides |
| कवाटफलकम् | कवाट–फलक (२.१) | a door panel |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to make |
| तम् | तद् (२.१) | it |
| एव | एव | itself |
| क्षणात् | क्षण (५.१) | in a moment |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छा | या | वृ | क्ष | मु | पा | श्र | य | न्ति | प | थि | षु | श्रा | न्ता | हि | पा | न्थाः | स | मं |
| ते | ष्वे | को | ऽस्य | शु | भं | शु | भे | न | म | न | सा | हृ | ष्य | न्न | नु | ध्या | य | ति |
| अ | न्यो | ह | र्तु | म | पे | क्ष | ते | ऽस्य | वि | ट | पा | ना | धा | र | य | ष्टेः | कृ | ते |
| क | श्चि | नि | श्चि | नु | ते | क | वा | ट | फ | ल | कं | क | र्तुं | त | मे | व | क्ष | णात् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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