सन्त्यक्ता यदि केतकी त्रिभुवनश्लाघ्या पुरद्रोहिणा तस्मिन्नेव हि पर्यवस्यति ततो वस्तुष्वसारज्ञता ।
किं वेणीषु न तां वहन्ति सुदृशः किं सा न विक्रीयते ।
किं नेमामुपलालयन्ति रसिकाः पृथ्वीभुजो मौलिभिः ॥
सन्त्यक्ता यदि केतकी त्रिभुवनश्लाघ्या पुरद्रोहिणा तस्मिन्नेव हि पर्यवस्यति ततो वस्तुष्वसारज्ञता ।
किं वेणीषु न तां वहन्ति सुदृशः किं सा न विक्रीयते ।
किं नेमामुपलालयन्ति रसिकाः पृथ्वीभुजो मौलिभिः ॥
किं वेणीषु न तां वहन्ति सुदृशः किं सा न विक्रीयते ।
किं नेमामुपलालयन्ति रसिकाः पृथ्वीभुजो मौलिभिः ॥
अन्वयः
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यदि त्रिभुवन-श्लाघ्या केतकी पुर-द्रोहिणा सन्त्यक्ता, ततः (तस्य) वस्तुषु असारज्ञता तस्मिन् एव हि पर्यवस्यति। किम् सुदृशः वेणीषु ताम् न वहन्ति? किम् सा न विक्रीयते? किम् रसिकाः पृथ्वीभुजः मौलिभिः इमाम् न उपलालयन्ति?
Summary
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If the Ketaki flower, praised in all three worlds, was abandoned by Shiva, then this only proves his inability to discern the value of things. Do beautiful women not wear it in their braids? Is it not sold? Do not connoisseur kings cherish it on their crowns?
पदच्छेदः
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| सन्त्यक्ता | सन्त्यक्त (सम्√त्यज्+क्त, १.१) | was abandoned |
| यदि | यदि | if |
| केतकी | केतकी (१.१) | the Ketaki flower |
| त्रिभुवनश्लाघ्या | त्रिभुवन–श्लाघ्य (१.१) | praiseworthy in the three worlds |
| पुरद्रोहिणा | पुर–द्रोहिन् (३.१) | by the enemy of the cities (Shiva) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in him |
| एव | एव | alone |
| हि | हि | indeed |
| पर्यवस्यति | पर्यवस्यति (परि+अव√सो कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it culminates |
| ततः | ततस् | from that |
| वस्तुषु | वस्तु (७.३) | in things |
| असारज्ञता | असार–ज्ञता (१.१) | inability to discern value |
| किम् | किम् | do |
| वेणीषु | वेणी (७.३) | in their braids |
| न | न | not |
| ताम् | तद् (२.१) | it |
| वहन्ति | वहन्ति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | wear |
| सुदृशः | सुदृश् (१.३) | beautiful-eyed women |
| किम् | किम् | is |
| सा | तद् (१.१) | it |
| न | न | not |
| विक्रीयते | विक्रीयते (वि√क्री भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | sold |
| किम् | किम् | do |
| न | न | not |
| इमाम् | इदम् (२.१) | this |
| उपलालयन्ति | उपलालयन्ति (उप√लल् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cherish |
| रसिकाः | रसिक (१.३) | connoisseurs |
| पृथ्वीभुजः | पृथ्वीभुज् (१.३) | kings |
| मौलिभिः | मौलि (३.३) | with their crowns |
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