सन्नद्धेषु पयोधरेषु चलिते मन्दं पुरोमारुते
कादम्बैः कमलाभिमानिभिरपि त्यक्त्वा सरः प्रस्थितम् ।
मिथ्यारोपितपौरुषैर्मधुकरैर्मुग्धैर्यदध्यासितं
तस्येदं फलमम्भसा प्रवहता सैवाब्जिनी मज्जिता ॥
सन्नद्धेषु पयोधरेषु चलिते मन्दं पुरोमारुते
कादम्बैः कमलाभिमानिभिरपि त्यक्त्वा सरः प्रस्थितम् ।
मिथ्यारोपितपौरुषैर्मधुकरैर्मुग्धैर्यदध्यासितं
तस्येदं फलमम्भसा प्रवहता सैवाब्जिनी मज्जिता ॥
कादम्बैः कमलाभिमानिभिरपि त्यक्त्वा सरः प्रस्थितम् ।
मिथ्यारोपितपौरुषैर्मधुकरैर्मुग्धैर्यदध्यासितं
तस्येदं फलमम्भसा प्रवहता सैवाब्जिनी मज्जिता ॥
अन्वयः
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पयोधरेषु सन्नद्धेषु, पुरः-मारुते मन्दम् चलिते (सति), कमल-अभिमानिभिः कादम्बैः अपि सरः त्यक्त्वा प्रस्थितम्। मुग्धैः मिथ्या-आरोपित-पौरुषैः मधुकरैः यत् (अब्जिनी) अध्यासितम्, तस्य इदम् फलम् (अस्ति यत्) प्रवहता अम्भसा सा अब्जिनी एव मज्जिता।
Summary
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When the clouds gathered and the east wind began to blow gently, even the Kadamba ducks, who take pride in the lotuses, left the lake and departed. The foolish bees, with their falsely assumed valor, remained. This is the result of their action: that very lotus plant was submerged by the flowing water.
पदच्छेदः
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| सन्नद्धेषु | सन्नद्ध (सम्√नह्+क्त, ७.३) | when they were ready/gathered |
| पयोधरेषु | पयोधर (७.३) | the clouds |
| चलिते | चलित (√चल्+क्त, ७.१) | began to move |
| मन्दम् | मन्दम् | gently |
| पुरोमारुते | पुरस्–मारुत (७.१) | the east wind |
| कादम्बैः | कादम्ब (३.३) | by the Kadamba ducks |
| कमलाभिमानिभिरपि | कमल–अभिमानिन् (३.३)–अपि | even by those proud of the lotuses |
| त्यक्त्वा | त्यक्त्वा (√त्यज्+क्त्वा) | having left |
| सरः | सरस् (२.१) | the lake |
| प्रस्थितम् | प्रस्थित (प्र√स्था+क्त, १.१) | they departed |
| मिथ्यारोपितपौरुषैः | मिथ्या–आरोपित–पौरुष (३.३) | by those with falsely attributed valor |
| मधुकरैः | मधुकर (३.३) | by the bees |
| मुग्धैः | मुग्ध (३.३) | foolish |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| अध्यासितम् | अध्यासित (अधि√आस्+क्त, १.१) | it was inhabited |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| फलम् | फल (१.१) | is the result |
| अम्भसा | अम्भस् (३.१) | by the water |
| प्रवहता | प्रवहत (३.१) | flowing |
| सा | तद् (१.१) | that |
| एव | एव | very |
| अब्जिनी | अब्जिनी (१.१) | lotus plant |
| मज्जिता | मज्जित (√मज्ज्+णिच्+क्त, १.१) | was submerged |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | न्न | द्धे | षु | प | यो | ध | रे | षु | च | लि | ते | म | न्दं | पु | रो | मा | रु | ते |
| का | द | म्बैः | क | म | ला | भि | मा | नि | भि | र | पि | त्य | क्त्वा | स | रः | प्र | स्थि | तम् |
| मि | थ्या | रो | पि | त | पौ | रु | षै | र्म | धु | क | रै | र्मु | ग्धै | र्य | द | ध्या | सि | तं |
| त | स्ये | दं | फ | ल | म | म्भ | सा | प्र | व | ह | ता | सै | वा | ब्जि | नी | म | ज्जि | ता |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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