विद्धं मर्मसु येन येन गरलोन्मिश्रा गिरः श्राविता
जज्वाल ज्वलनास्त्रवन्निशि निशि क्रूरैः करैर्यः सदा ।
सर्वे ते सुहृदो बभूवुरधुना सङ्गे मिथः कामिनो-
र्दौर्जन्यस्य विभावनात्परिणतौ दूती परं दूषिता ॥
विद्धं मर्मसु येन येन गरलोन्मिश्रा गिरः श्राविता
जज्वाल ज्वलनास्त्रवन्निशि निशि क्रूरैः करैर्यः सदा ।
सर्वे ते सुहृदो बभूवुरधुना सङ्गे मिथः कामिनो-
र्दौर्जन्यस्य विभावनात्परिणतौ दूती परं दूषिता ॥
जज्वाल ज्वलनास्त्रवन्निशि निशि क्रूरैः करैर्यः सदा ।
सर्वे ते सुहृदो बभूवुरधुना सङ्गे मिथः कामिनो-
र्दौर्जन्यस्य विभावनात्परिणतौ दूती परं दूषिता ॥
अन्वयः
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येन मर्मसु विद्धम्, येन गरल-उन्मिश्राः गिरः श्राविताः, यः सदा निशि निशि क्रूरैः करैः ज्वलन-अस्त्रवत् जज्वाल, ते सर्वे अधुना मिथः कामिनोः सङ्गे सुहृदः बभूवुः। परिणतौ दौर्जन्यस्य विभावनात् परम् दूती दूषिता।
Summary
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The moon, whose cruel rays pierced the vital spots and blazed like a fiery weapon night after night, and others (like the cuckoo) whose sounds were like poison-laced words—all of them have now become friends in the lovers' union. In the end, due to the perception of wickedness, only the female messenger was blamed.
पदच्छेदः
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| विद्धम् | विद्ध (√व्यध्+क्त, १.१) | was pierced |
| मर्मसु | मर्मन् (७.३) | in the vital spots |
| येन | यद् (३.१) | by which (moon) |
| येन | यद् (३.१) | by which (cuckoo, etc.) |
| गरलोन्मिश्राः | गरल–उन्मिश्र (१.३) | mixed with poison |
| गिरः | गिर् (१.३) | words (sounds) |
| श्राविताः | श्रावित (√श्रु+णिच्+क्त, १.३) | were made to be heard |
| जज्वाल | जज्वाल (√ज्वल् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | blazed |
| ज्वलनास्त्रवत् | ज्वलन–अस्त्रवत् | like a fiery weapon |
| निशि | निशि | night |
| निशि | निशि | after night |
| क्रूरैः | क्रूर (३.३) | cruel |
| करैः | कर (३.३) | with rays |
| यः | यद् (१.१) | which (moon) |
| सदा | सदा | always |
| सर्वे | सर्व (१.३) | all |
| ते | तद् (१.३) | they |
| सुहृदः | सुहृद् (१.३) | friends |
| बभूवुः | बभूवुः (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | became |
| अधुना | अधुना | now |
| सङ्गे | सङ्ग (७.१) | in the union |
| मिथः | मिथस् | mutual |
| कामिनोः | कामिन् (६.२) | of the lovers |
| दौर्जन्यस्य | दौर्जन्य (६.१) | of the wickedness |
| विभावनात् | विभावना (५.१) | from the perception |
| परिणतौ | परिणति (७.१) | in the end |
| दूती | दूती (१.१) | the female messenger |
| परम् | परम् | only |
| दूषिता | दूषित (√दूष्+णिच्+क्त, १.१) | was blamed |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | द्धं | म | र्म | सु | ये | न | ये | न | ग | र | लो | न्मि | श्रा | गि | रः | श्रा | वि | ता |
| ज | ज्वा | ल | ज्व | ल | ना | स्त्र | व | न्नि | शि | नि | शि | क्रू | रैः | क | रै | र्यः | स | दा |
| स | र्वे | ते | सु | हृ | दो | ब | भू | वु | र | धु | ना | स | ङ्गे | मि | थः | का | मि | नो |
| र्दौ | र्ज | न्य | स्य | वि | भा | व | ना | त्प | रि | ण | तौ | दू | ती | प | रं | दू | षि | ता |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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