गन्तव्यं जलमध्य एव गतवन्मन्तव्यमेतद्वपुः
क्षन्तव्या लवणानिला इति कृतं निर्विद्य सांयात्रिक ।
अन्तर्वेश्मनि हंसतूलशयने सुप्त्वा सुखं जाग्रतो
हस्ताग्रे धनमेष्यति स्वयमिति भ्रातः किमास्ते हृदि ॥
गन्तव्यं जलमध्य एव गतवन्मन्तव्यमेतद्वपुः
क्षन्तव्या लवणानिला इति कृतं निर्विद्य सांयात्रिक ।
अन्तर्वेश्मनि हंसतूलशयने सुप्त्वा सुखं जाग्रतो
हस्ताग्रे धनमेष्यति स्वयमिति भ्रातः किमास्ते हृदि ॥
क्षन्तव्या लवणानिला इति कृतं निर्विद्य सांयात्रिक ।
अन्तर्वेश्मनि हंसतूलशयने सुप्त्वा सुखं जाग्रतो
हस्ताग्रे धनमेष्यति स्वयमिति भ्रातः किमास्ते हृदि ॥
अन्वयः
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(हे) सांयात्रिक, 'जलमध्यम् एव गन्तव्यम्, एतत् वपुः गतवत् मन्तव्यम्, लवण-अनिलाः क्षन्तव्याः' इति निर्विद्य कृतम्। (हे) भ्रातः, 'अन्तः-वेश्मनि हंसतूल-शयने सुखम् सुप्त्वा जाग्रतः हस्त-अग्रे धनम् स्वयम् एष्यति' इति किम् हृदि आस्ते?
Summary
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O sea-merchant, enough with this despairing thought: "I must go into the sea, this body must be considered as good as gone, the salty winds must be endured." Brother, do you really think that wealth will come by itself to your fingertips as you wake up after sleeping comfortably at home on a bed of swan-down?
पदच्छेदः
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| गन्तव्यम् | गन्तव्य (√गम्+तव्यत्, १.१) | one must go |
| जलमध्यम् | जल–मध्य (२.१) | into the middle of the water |
| एव | एव | only |
| गतवत् | गतवत् (२.१) | as good as gone |
| मन्तव्यम् | मन्तव्य (√मन्+तव्यत्, १.१) | should be considered |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| वपुः | वपुस् (१.१) | body |
| क्षन्तव्याः | क्षन्तव्य (√क्षम्+तव्यत्, १.३) | must be endured |
| लवणानिलाः | लवण–अनिल (१.३) | salty winds |
| इति | इति | thus |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, २.१) | enough |
| निर्विद्य | निर्विद्य (निर्√विद्+ल्यप्) | with despair |
| सांयात्रिक | सांयात्रिक (८.१) | O sea-merchant |
| अन्तर्वेश्मनि | अन्तर्–वेश्मन् (७.१) | inside the house |
| हंसतूलशयने | हंसतूल–शयन (७.१) | on a bed of swan-down |
| सुप्त्वा | सुप्त्वा (√स्वप्+क्त्वा) | having slept |
| सुखम् | सुखम् | comfortably |
| जाग्रतः | जाग्रत् (√जागृ+शतृ, ६.१) | of one who wakes up |
| हस्ताग्रे | हस्त–अग्र (७.१) | at the fingertips |
| धनम् | धन (१.१) | wealth |
| एष्यति | एष्यति (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will come |
| स्वयम् | स्वयम् | by itself |
| इति | इति | thus |
| भ्रातः | भ्रातृ (८.१) | O brother |
| किम् | किम् (१.१) | is it |
| आस्ते | आस्ते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | in |
| हृदि | हृद् (७.१) | your heart |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | न्त | व्यं | ज | ल | म | ध्य | ए | व | ग | त | व | न्म | न्त | व्य | मे | त | द्व | पुः |
| क्ष | न्त | व्या | ल | व | णा | नि | ला | इ | ति | कृ | तं | नि | र्वि | द्य | सां | या | त्रि | क |
| अ | न्त | र्वे | श्म | नि | हं | स | तू | ल | श | य | ने | सु | प्त्वा | सु | खं | जा | ग्र | तो |
| ह | स्ता | ग्रे | ध | न | मे | ष्य | ति | स्व | य | मि | ति | भ्रा | तः | कि | मा | स्ते | हृ | दि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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