किं त्वं दोहदमीहसे किमुदकैः सिक्तोऽसि किं केनचि-
द्बद्धस्ते सकृदालवालवलयः किं ते मही संस्कृता ।
द्विस्त्रिः पुष्प्यसि वासरस्य न गुणान्धुत्तूर ते निह्नुवे
दुर्गन्धो न भवेदियान्यदि ततस्त्वं पारिजातोऽसि नः ॥
किं त्वं दोहदमीहसे किमुदकैः सिक्तोऽसि किं केनचि-
द्बद्धस्ते सकृदालवालवलयः किं ते मही संस्कृता ।
द्विस्त्रिः पुष्प्यसि वासरस्य न गुणान्धुत्तूर ते निह्नुवे
दुर्गन्धो न भवेदियान्यदि ततस्त्वं पारिजातोऽसि नः ॥
द्बद्धस्ते सकृदालवालवलयः किं ते मही संस्कृता ।
द्विस्त्रिः पुष्प्यसि वासरस्य न गुणान्धुत्तूर ते निह्नुवे
दुर्गन्धो न भवेदियान्यदि ततस्त्वं पारिजातोऽसि नः ॥
अन्वयः
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(हे) धुत्तूर, त्वम् किम् दोहदम् ईहसे? किम् (त्वम्) उदकैः सिक्तः असि? किम् केनचित् ते आलवाल-वलयः सकृत् बद्धः? किम् ते मही संस्कृता? (त्वम्) वासरस्य द्विः त्रिः पुष्प्यसि। ते गुणान् न निह्नुवे। यदि इयान् दुर्गन्धः न भवेत्, ततः त्वम् नः पारिजातः असि।
Summary
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O Dhattura plant, do you desire special nourishment? Are you watered? Has anyone ever built a basin for you? Was the ground prepared for you? You bloom two or three times a day. I do not deny your qualities. If you did not have such a foul smell, you would be a Parijata tree for us.
पदच्छेदः
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| किम् | किम् (२.१) | do |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| दोहदम् | दोहद (२.१) | special nourishment |
| ईहसे | ईहसे (√ईह् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | desire |
| किम् | किम् (१.१) | are |
| उदकैः | उदक (३.३) | with water |
| सिक्तः | सिक्त (√सिच्+क्त, १.१) | watered |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| किम् | किम् (१.१) | was |
| केनचित् | केनचित् (३.१) | by anyone |
| बद्धः | बद्ध (√बन्ध्+क्त, १.१) | made |
| ते | युष्मद् (६.१) | for you |
| सकृत् | सकृत् | once |
| आलवालवलयः | आलवाल–वलय (१.१) | a basin-ring |
| किम् | किम् (१.१) | was |
| ते | युष्मद् (६.१) | for you |
| मही | मही (१.१) | the ground |
| संस्कृता | संस्कृत (सम्√कृ+क्त, १.१) | prepared |
| द्विः | द्विस् | twice |
| त्रिः | त्रिस् | thrice |
| पुष्यसि | पुष्यसि (√पुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you bloom |
| वासरस्य | वासर (६.१) | in a day |
| न | न | not |
| गुणान् | गुण (२.३) | qualities |
| धुत्तूर | धुत्तूर (८.१) | O Dhattura plant |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| निह्नुवे | निह्नुवे (नि√ह्नु कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I deny |
| दुर्गन्धः | दुर्गन्ध (१.१) | foul smell |
| न | न | not |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | were there |
| इयान् | इयत् (१.१) | so much |
| यदि | यदि | if |
| ततः | ततस् | then |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| पारिजातः | पारिजात (१.१) | the Parijata tree |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are |
| नः | अस्मद् (६.१) | for us |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | त्वं | दो | ह | द | मी | ह | से | कि | मु | द | कैः | सि | क्तो | ऽसि | किं | के | न | चि |
| द्ब | द्ध | स्ते | स | कृ | दा | ल | वा | ल | व | ल | यः | किं | ते | म | ही | सं | स्कृ | ता |
| द्वि | स्त्रिः | पु | ष्प्य | सि | वा | स | र | स्य | न | गु | णा | न्धु | त्तू | र | ते | नि | ह्नु | वे |
| दु | र्ग | न्धो | न | भ | वे | दि | या | न्य | दि | त | त | स्त्वं | पा | रि | जा | तो | ऽसि | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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