को दोषः परतो गते मधुकरे क्रीतः किमेष त्वया
क्रीतेनापि किमास्यते क्वचिदिह ग्लानोदरेण क्षणम् ।
जानास्येवमथापि चेक्षिपसि तं कर्णानिलैर्दूरतो
दुर्धर्षोऽसि निरङ्कुशोऽसि भवतो मत्तेभ वक्तैव कः ॥
को दोषः परतो गते मधुकरे क्रीतः किमेष त्वया
क्रीतेनापि किमास्यते क्वचिदिह ग्लानोदरेण क्षणम् ।
जानास्येवमथापि चेक्षिपसि तं कर्णानिलैर्दूरतो
दुर्धर्षोऽसि निरङ्कुशोऽसि भवतो मत्तेभ वक्तैव कः ॥
क्रीतेनापि किमास्यते क्वचिदिह ग्लानोदरेण क्षणम् ।
जानास्येवमथापि चेक्षिपसि तं कर्णानिलैर्दूरतो
दुर्धर्षोऽसि निरङ्कुशोऽसि भवतो मत्तेभ वक्तैव कः ॥
अन्वयः
AI
(हे) मत्त-इभ, मधुकरे परतः गते कः दोषः? एषः त्वया किम् क्रीतः? क्रीतेन अपि ग्लान-उदरेण इह क्वचित् क्षणम् किम् आस्यते? एवम् जानासि अथ अपि च तम् कर्ण-अनिलैः दूरतः क्षिपसि। (त्वम्) दुर्धर्षः असि, निरङ्कुशः असि। भवतः वक्ता एव कः?
Summary
AI
O rutting elephant, what is the harm if the bee goes elsewhere? Have you purchased it? Even if purchased, can a hungry creature stay in one place for even a moment? You know this, and yet you fling it far away with the wind from your ears. You are unassailable, you are unrestrained. Who can even advise you?
पदच्छेदः
AI
| कः | किम् (१.१) | what |
| दोषः | दोष (१.१) | fault |
| परतः | परतस् | elsewhere |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | when it has gone |
| मधुकरे | मधुकर (७.१) | the bee |
| क्रीतः | क्रीत (√क्री+क्त, १.१) | bought |
| किम् | किम् (१.१) | was |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| क्रीतेन | क्रीत (३.१) | even if bought |
| अपि | अपि | even |
| किम् | किम् (१.१) | can |
| आस्यते | आस्यते (√आस् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it stay |
| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| इह | इह | here |
| ग्लानोदरेण | ग्लान–उदर (३.१) | with a shrunken belly (hungry) |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | for a moment |
| जानासि | जानासि (√ज्ञा कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you know |
| एवम् | एवम् | this |
| अथापि | अथापि | and yet |
| च | च | and |
| क्षिपसि | क्षिपसि (√क्षिप् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you throw |
| तम् | तद् (२.१) | it |
| कर्णानिलैः | कर्ण–अनिल (३.३) | with the winds from your ears |
| दूरतः | दूरतः | far away |
| दुर्धर्षः | दुर्धर्ष (१.१) | unassailable |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| निरङ्कुशः | निरङ्कुश (१.१) | unrestrained |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| भवतः | भवत् (६.१) | to you |
| मत्तेभ | मत्त–इभ (८.१) | O rutting elephant |
| वक्ता | वक्तृ (१.१) | speaker (advisor) |
| एव | एव | even |
| कः | किम् (१.१) | who |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | दो | षः | प | र | तो | ग | ते | म | धु | क | रे | क्री | तः | कि | मे | ष | त्व | या |
| क्री | ते | ना | पि | कि | मा | स्य | ते | क्व | चि | दि | ह | ग्ला | नो | द | रे | ण | क्ष | णम् |
| जा | ना | स्ये | व | म | था | पि | चे | क्षि | प | सि | तं | क | र्णा | नि | लै | र्दू | र | तो |
| दु | र्ध | र्षो | ऽसि | नि | र | ङ्कु | शो | ऽसि | भ | व | तो | म | त्ते | भ | व | क्तै | व | कः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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