सैवाहं प्रमदा नृणामधिगतावेतौ च तौ नूपुराव्
एषास्माकमवृत्तिरेव सहजव्रीडाधनः स्त्रीजनः ।
इत्थं लज्जितया स्मृतेरुपगमे मत्वा तनुं सम्भ्रमा-
त्पुम्भावः प्रथमं रतिव्यतिकरे मुक्तस्ततो वल्लभः ॥
सैवाहं प्रमदा नृणामधिगतावेतौ च तौ नूपुराव्
एषास्माकमवृत्तिरेव सहजव्रीडाधनः स्त्रीजनः ।
इत्थं लज्जितया स्मृतेरुपगमे मत्वा तनुं सम्भ्रमा-
त्पुम्भावः प्रथमं रतिव्यतिकरे मुक्तस्ततो वल्लभः ॥
एषास्माकमवृत्तिरेव सहजव्रीडाधनः स्त्रीजनः ।
इत्थं लज्जितया स्मृतेरुपगमे मत्वा तनुं सम्भ्रमा-
त्पुम्भावः प्रथमं रतिव्यतिकरे मुक्तस्ततो वल्लभः ॥
अन्वयः
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“सा एव अहम् प्रमदा, नृणाम् (इव) अधिगतौ। एतौ च तौ नूपुरौ। एषा अस्माकम् अवृत्तिः एव। स्त्री-जनः सहज-व्रीडा-धनः।” इत्थम् रति-व्यतिकरे स्मृतेः उपगमे (सति) लज्जितया (तया) मत्वा, सम्भ्रमात् प्रथमम् पुम्-भावः मुक्तः, ततः वल्लभः।
Summary
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During lovemaking, in a role-reversal, she suddenly remembered her identity: "I am that same woman, now acting like a man. These are my anklets. This is not my natural behavior; a woman's wealth is her innate modesty." Thinking this, ashamed, she first abandoned her masculine role in confusion, and only then her lover.
पदच्छेदः
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| सा | तद् (१.१) | that same |
| एव | एव | indeed |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I am |
| प्रमदा | प्रमदा (१.१) | a woman |
| नृणाम् | नृ (६.३) | of men |
| अधिगतौ | अधिगत (अधि√गम्+क्त, १.२) | have attained (the state) |
| एतौ | एतद् (१.२) | these |
| च | च | and |
| तौ | तद् (१.२) | those |
| नूपुरौ | नूपुर (१.२) | anklets |
| एषा | एतद् (१.१) | this |
| अस्माकम् | अस्मद् (६.३) | our |
| अवृत्तिः | अवृत्ति (१.१) | unnatural behavior |
| एव | एव | indeed |
| सहजव्रीडाधनः | सहज–व्रीडा–धन (१.१) | whose wealth is innate modesty |
| स्त्रीजनः | स्त्री–जन (१.१) | womankind |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| लज्जितया | लज्जित (३.१) | by her who was ashamed |
| स्मृतेः | स्मृति (६.१) | of memory |
| उपगमे | उपगम (७.१) | on the arrival |
| मत्वा | मत्वा (√मन्+क्त्वा) | having thought |
| तनुम् | तनु (२.१) | the body |
| सम्भ्रमात् | सम्भ्रम (५.१) | in confusion |
| पुम्भावः | पुम्स्–भाव (१.१) | the masculine role |
| प्रथमम् | प्रथमम् | first |
| रतिव्यतिकरे | रति–व्यतिकर (७.१) | during lovemaking |
| मुक्तः | मुक्त (√मुच्+क्त, १.१) | was abandoned |
| ततः | ततः | then |
| वल्लभः | वल्लभ (१.१) | the lover |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सै | वा | हं | प्र | म | दा | नृ | णा | म | धि | ग | ता | वे | तौ | च | तौ | नू | पु | रा |
| वे | षा | स्मा | क | म | वृ | त्ति | रे | व | स | ह | ज | व्री | डा | ध | नः | स्त्री | ज | नः |
| इ | त्थं | ल | ज्जि | त | या | स्मृ | ते | रु | प | ग | मे | म | त्वा | त | नुं | स | म्भ्र | मा |
| त्पु | म्भा | वः | प्र | थ | मं | र | ति | व्य | ति | क | रे | मु | क्त | स्त | तो | व | ल्ल | भः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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