प्रहरविरतौ मध्ये वाह्नस्ततोऽपि परेऽथवा
किमुत सकले जाते वाह्णि प्रिय त्वमिहैष्यसि ।
इति दिनशतप्राप्यं देशं प्रियस्य यियासतो
हरति गमनं बालालापैः सबाष्पगलज्जलैः ॥
प्रहरविरतौ मध्ये वाह्नस्ततोऽपि परेऽथवा
किमुत सकले जाते वाह्णि प्रिय त्वमिहैष्यसि ।
इति दिनशतप्राप्यं देशं प्रियस्य यियासतो
हरति गमनं बालालापैः सबाष्पगलज्जलैः ॥
किमुत सकले जाते वाह्णि प्रिय त्वमिहैष्यसि ।
इति दिनशतप्राप्यं देशं प्रियस्य यियासतो
हरति गमनं बालालापैः सबाष्पगलज्जलैः ॥
अन्वयः
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प्रिय, त्वम् प्रहर-विरतौ, वा अह्नः मध्ये, ततः अपि परे अथवा, किम् उत सकले अह्नि जाते वा इह एष्यसि? इति स-बाष्प-गलत्-जलैः बाल-आलापैः (बाला) दिन-शत-प्राप्यं देशं यियासतः प्रियस्य गमनं हरति ।
Summary
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"My love, will you return at the end of the first watch, or at midday, or later, or perhaps when the whole day has passed?" With such innocent questions, accompanied by streaming tears, the young woman prevents the departure of her beloved, who wishes to travel to a land that would take a hundred days to reach.
पदच्छेदः
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| प्रहर | प्रहर | watch |
| विरतौ | विरति (७.१) | at the end of a |
| मध्ये | मध्य (७.१) | in the middle |
| वा | वा | or |
| अह्नः | अहन् (६.१) | of the day |
| ततः | ततस् | than that |
| अपि | अपि | even |
| परे | पर (७.१) | later |
| अथवा | अथवा | or |
| किम् | किम् | or |
| उत | उत | even |
| सकले | सकल (७.१) | the entire |
| जाते | जात (√जन्+क्त, ७.१) | having passed |
| अह्नि | अहन् (७.१) | day |
| प्रिय | प्रिय (८.१) | O beloved |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| इह | इह | here |
| एष्यसि | एष्यसि (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will you come |
| इति | इति | thus |
| दिन | दिन | day |
| शत | शत | hundred |
| प्राप्यम् | प्राप्य (प्र√आप्+ण्यत्, २.१) | reachable in a |
| देशम् | देश (२.१) | to a country |
| प्रियस्य | प्रिय (६.१) | of the beloved |
| यियासतः | यियासत् (√या+सन्+शतृ, ६.१) | of him who wishes to go |
| हरति | हरति (√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | prevents |
| गमनम् | गमन (२.१) | the departure |
| बाल | बाल | childish |
| आलापैः | आलाप (३.३) | with talk |
| स | स | with |
| बाष्प | बाष्प | tears |
| गलत् | गलत् (√गल्+शतृ) | streaming |
| जलैः | जल (३.३) | water |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ह | र | वि | र | तौ | म | ध्ये | वा | ह्न | स्त | तो | ऽपि | प | रे | ऽथ | वा |
| कि | मु | त | स | क | ले | जा | ते | वा | ह्णि | प्रि | य | त्व | मि | है | ष्य | सि |
| इ | ति | दि | न | श | त | प्रा | प्यं | दे | शं | प्रि | य | स्य | यि | या | स | तो |
| ह | र | ति | ग | म | नं | बा | ला | ला | पैः | स | बा | ष्प | ग | ल | ज्ज | लैः |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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