याताः किं न मिलन्ति सुन्दरि पुनश्चिन्ता त्वया मत्कृते
नो कार्या नितरां कृशामि कथयत्येवं सबाष्पे मयि ।
लज्जामन्थरतारकेण निपतद्धाराश्रुणा चक्षुषा
दृष्ट्वा मां हसितेन भाविमरणोत्साहस्तया सूचितः ॥
याताः किं न मिलन्ति सुन्दरि पुनश्चिन्ता त्वया मत्कृते
नो कार्या नितरां कृशामि कथयत्येवं सबाष्पे मयि ।
लज्जामन्थरतारकेण निपतद्धाराश्रुणा चक्षुषा
दृष्ट्वा मां हसितेन भाविमरणोत्साहस्तया सूचितः ॥
नो कार्या नितरां कृशामि कथयत्येवं सबाष्पे मयि ।
लज्जामन्थरतारकेण निपतद्धाराश्रुणा चक्षुषा
दृष्ट्वा मां हसितेन भाविमरणोत्साहस्तया सूचितः ॥
अन्वयः
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सुन्दरि, याताः किं पुनः न मिलन्ति? त्वया मत्-कृते चिन्ता नो कार्या । (त्वम्) नितरां कृशा असि । एवं स-बाष्पे मयि कथयति (सति), तया लज्जा-मन्थर-तारकेण निपतत्-धारा-अश्रुणा चक्षुषा मां दृष्ट्वा हसितेन भावि-मरण-उत्साहः सूचितः ।
Summary
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As I, with tears in my eyes, said, "O beautiful one, don't those who depart meet again? You shouldn't worry for my sake; you are becoming so thin," she looked at me with eyes whose pupils were slow with shyness and from which streams of tears fell. Then, with a faint smile, she indicated her resolve to die if I did not return.
पदच्छेदः
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| याताः | यात (√या+क्त, १.३) | those who have gone |
| किम् | किम् | do |
| न | न | not |
| मिलन्ति | मिलन्ति (√मिल् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | meet |
| सुन्दरि | सुन्दरी (८.१) | O beautiful one |
| पुनः | पुनर् | again |
| चिन्ता | चिन्ता (१.१) | worry |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| मत् | अस्मद् | my |
| कृते | कृते | for the sake of |
| नो | नो | not |
| कार्या | कार्य (√कृ+ण्यत्, १.१) | to be done |
| नितराम् | नितराम् | extremely |
| कृशा | कृश (१.१) | thin |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| कथयति | कथयत् (√कथ+शतृ, ७.१) | while speaking |
| एवम् | एवम् | thus |
| स | स | with |
| बाष्पे | बाष्प (७.१) | tears |
| मयि | अस्मद् (७.१) | I |
| लज्जा | लज्जा | shyness |
| मन्थर | मन्थर | slow |
| तारकेण | तारक (३.१) | with pupils |
| निपतत् | निपतत् (नि√पत्+शतृ) | falling |
| धारा | धारा | streams of |
| अश्रुणा | अश्रु (३.१) | with tears |
| चक्षुषा | चक्षुस् (३.१) | with the eye |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having looked |
| माम् | अस्मद् (२.१) | at me |
| हसितेन | हसित (३.१) | with a smile |
| भावि | भाविन् | future |
| मरण | मरण | death |
| उत्साहः | उत्साह (१.१) | resolve for |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| सूचितः | सूचित (√सूच्+क्त, १.१) | was indicated |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | ताः | किं | न | मि | ल | न्ति | सु | न्द | रि | पु | न | श्चि | न्ता | त्व | या | म | त्कृ | ते |
| नो | का | र्या | नि | त | रां | कृ | शा | मि | क | थ | य | त्ये | वं | स | बा | ष्पे | म | यि |
| ल | ज्जा | म | न्थ | र | ता | र | के | ण | नि | प | त | द्धा | रा | श्रु | णा | च | क्षु | षा |
| दृ | ष्ट्वा | मां | ह | सि | ते | न | भा | वि | म | र | णो | त्सा | ह | स्त | या | सू | चि | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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