लाक्षालक्ष्मललाटपट्टमभितः केयूरमुद्रा गले
वक्त्रे कज्जलकालिमा नयनयोस्ताम्बूलरागो घनः ।
दृष्टा कोपविधायि मण्डनमिदं प्रातश्चिरं प्रेयसो
लीलातामरसोदरे मृगदृशः श्वासाः समाप्तिं गताः ॥
लाक्षालक्ष्मललाटपट्टमभितः केयूरमुद्रा गले
वक्त्रे कज्जलकालिमा नयनयोस्ताम्बूलरागो घनः ।
दृष्टा कोपविधायि मण्डनमिदं प्रातश्चिरं प्रेयसो
लीलातामरसोदरे मृगदृशः श्वासाः समाप्तिं गताः ॥
वक्त्रे कज्जलकालिमा नयनयोस्ताम्बूलरागो घनः ।
दृष्टा कोपविधायि मण्डनमिदं प्रातश्चिरं प्रेयसो
लीलातामरसोदरे मृगदृशः श्वासाः समाप्तिं गताः ॥
अन्वयः
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प्रातः प्रेयसः ललाट-पट्टम् अभितः लाक्षा-लक्ष्म, गले केयूर-मुद्रा, वक्त्रे कज्जल-कालिमा, नयनयोः घनः ताम्बूल-रागः, इदम् कोप-विधायि मण्डनम् चिरम् दृष्ट्वा, मृग-दृशः श्वासाः लीला-तामरस-उदरे समाप्तिम् गताः।
Summary
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In the morning, seeing for a long time the anger-inducing "decorations" on her beloved—a mark of red lac on his forehead, the imprint of an armlet on his neck, the blackness of collyrium on his mouth, and a deep stain of betel on his eyes—the deer-eyed woman's breaths came to an end within the lotus she held playfully.
पदच्छेदः
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| लाक्षालक्ष्मललाटपट्टम् | लाक्षा–लक्ष्म–ललाट–पट्ट (२.१) | the mark of red lac on the expanse of the forehead |
| अभितः | अभितः | around |
| केयूरमुद्रा | केयूर–मुद्रा (१.१) | the imprint of an armlet |
| गले | गल (७.१) | on the neck |
| वक्त्रे | वक्त्र (७.१) | on the mouth |
| कज्जलकालिमा | कज्जल–कालिमन् (१.१) | the blackness of collyrium |
| नयनयोः | नयन (७.२) | on the eyes |
| ताम्बूलरागः | ताम्बूल–राग (१.१) | the stain of betel |
| घनः | घन (१.१) | deep |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| कोपविधायि | कोप–विधायिन् (२.१) | anger-inducing |
| मण्डनम् | मण्डन (२.१) | decoration |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| प्रातः | प्रातर् | in the morning |
| चिरम् | चिरम् | for a long time |
| प्रेयसः | प्रेयस् (६.१) | of her beloved |
| लीलातामरसोदरे | लीला–तामरस–उदर (७.१) | inside the play-lotus |
| मृगदृशः | मृगदृश् (६.१) | of the deer-eyed one |
| श्वासाः | श्वास (१.३) | the breaths |
| समाप्तिम् | समाप्ति (२.१) | an end |
| गताः | गत (√गम्+क्त, १.३) | went to |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ला | क्षा | ल | क्ष्म | ल | ला | ट | प | ट्ट | म | भि | तः | के | यू | र | मु | द्रा | ग | ले |
| व | क्त्रे | क | ज्ज | ल | का | लि | मा | न | य | न | यो | स्ता | म्बू | ल | रा | गो | घ | नः |
| दृ | ष्टा | को | प | वि | धा | यि | म | ण्ड | न | मि | दं | प्रा | त | श्चि | रं | प्रे | य | सो |
| ली | ला | ता | म | र | सो | द | रे | मृ | ग | दृ | शः | श्वा | साः | स | मा | प्तिं | ग | ताः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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