कपोले पत्राली करतलनिरोधेन मृदिता
निपीतो निःश्वासैरयममृतहृद्योऽधररसः ।
मुहुः कण्ठे लग्नस्तरलयति बाष्पः स्तनतटं
प्रियो मन्युर्जातस्तव निरनुरोधे न तु वयम् ॥
कपोले पत्राली करतलनिरोधेन मृदिता
निपीतो निःश्वासैरयममृतहृद्योऽधररसः ।
मुहुः कण्ठे लग्नस्तरलयति बाष्पः स्तनतटं
प्रियो मन्युर्जातस्तव निरनुरोधे न तु वयम् ॥
निपीतो निःश्वासैरयममृतहृद्योऽधररसः ।
मुहुः कण्ठे लग्नस्तरलयति बाष्पः स्तनतटं
प्रियो मन्युर्जातस्तव निरनुरोधे न तु वयम् ॥
अन्वयः
AI
(हे) निरनुरोधे, (तव) करतल-निरोधेन कपोले पत्राली मृदिता। निःश्वासैः अयम् अमृत-हृद्यः अधर-रसः निपीतः। कण्ठे लग्नः बाष्पः मुहुः स्तन-तटम् तरलयति। तव मन्युः प्रियः जातः, वयम् तु न।
Summary
AI
A lover tells his angry beloved: "O relentless one, the decorative paintings on your cheek are smudged by the pressure of your palm. Your sighs have drunk up the nectar-sweet juice of your lips. The tears clinging to your throat repeatedly moisten your breasts. It seems your anger has become your beloved, not I."
पदच्छेदः
AI
| कपोले | कपोल (७.१) | on the cheek |
| पत्राली | पत्राली (१.१) | the decorative painting |
| करतलनिरोधेन | करतल–निरोध (३.१) | by the pressure of the palm |
| मृदिता | मृदित (√मृद्+क्त, १.१) | is smudged |
| निपीतः | निपीत (नि√पा+क्त, १.१) | is drunk |
| निःश्वासैः | निःश्वास (३.३) | by the sighs |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अमृतहृद्यः | अमृत–हृद्य (१.१) | nectar-sweet |
| अधररसः | अधर–रस (१.१) | juice of the lip |
| मुहुः | मुहुः | repeatedly |
| कण्ठे | कण्ठ (७.१) | in the throat |
| लग्नः | लग्न (√लग्+क्त, १.१) | clinging |
| तरलयति | तरलयति (√तरलयति कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | moistens |
| बाष्पः | बाष्प (१.१) | tear |
| स्तनतटम् | स्तन–तट (२.१) | the breast-region |
| प्रियः | प्रिय (१.१) | beloved |
| मन्युः | मन्यु (१.१) | anger |
| जातः | जात (√जन्+क्त, १.१) | has become |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| निरनुरोधे | निरनुरोधा (८.१) | O relentless one |
| न | न | not |
| तु | तु | but |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | I |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | पो | ले | प | त्रा | ली | क | र | त | ल | नि | रो | धे | न | मृ | दि | ता |
| नि | पी | तो | निः | श्वा | सै | र | य | म | मृ | त | हृ | द्यो | ऽध | र | र | सः |
| मु | हुः | क | ण्ठे | ल | ग्न | स्त | र | ल | य | ति | बा | ष्पः | स्त | न | त | टं |
| प्रि | यो | म | न्यु | र्जा | त | स्त | व | नि | र | नु | रो | धे | न | तु | व | यम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.