जाता नोत्कलिका स्तनौ न लुलितौ गात्रं न रोमाञ्चितं
वक्त्रं स्वेदकणान्वितं न सहसा यावच्छठेनामुना ।
दृष्टेनैव मनो हृतं धृतिमुषा प्राणेश्वरेणाद्य मे
तत्केनात्र निरूप्यमाणनिपुणो मानः समाधीयताम् ॥
जाता नोत्कलिका स्तनौ न लुलितौ गात्रं न रोमाञ्चितं
वक्त्रं स्वेदकणान्वितं न सहसा यावच्छठेनामुना ।
दृष्टेनैव मनो हृतं धृतिमुषा प्राणेश्वरेणाद्य मे
तत्केनात्र निरूप्यमाणनिपुणो मानः समाधीयताम् ॥
वक्त्रं स्वेदकणान्वितं न सहसा यावच्छठेनामुना ।
दृष्टेनैव मनो हृतं धृतिमुषा प्राणेश्वरेणाद्य मे
तत्केनात्र निरूप्यमाणनिपुणो मानः समाधीयताम् ॥
अन्वयः
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अद्य यावत् अमुना धृतिमुषा शठेन प्राणेश्वरेण दृष्टेन एव मे मनः हृतम्, (तावत्) उत्कलिका न जाता, स्तनौ न लुलितौ, गात्रम् न रोमाञ्चितम्, वक्त्रम् सहसा स्वेदकणान्वितम् न (जातम्)। तत् अत्र केन निरूप्यमाणनिपुणः मानः समाधीयताम्?
Summary
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A woman laments, "Today, just by the mere sight of that deceitful, composure-stealing lord of my life, my heart was stolen—before any longing could arise, my breasts tremble, my body horripilate, or my face suddenly break into sweat. So, by what clever reasoning can my pride be maintained now?"
पदच्छेदः
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| जाता | जात (√जन्+क्त, १.१) | arose |
| न | न | not |
| उत्कलिका | उत्कलिका (१.१) | longing |
| स्तनौ | स्तन (१.२) | the two breasts |
| न | न | not |
| लुलितौ | लुलित (√लुल्+क्त, १.२) | trembled |
| गात्रम् | गात्र (१.१) | the body |
| न | न | not |
| रोमाञ्चितम् | रोमाञ्चित (१.१) | horripilated |
| वक्त्रम् | वक्त्र (१.१) | the face |
| स्वेदकणान्वितम् | स्वेद–कण–अन्वित (१.१) | covered with drops of sweat |
| न | न | not |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| यावत् | यावत् | as soon as |
| शठेन | शठ (३.१) | by the deceitful one |
| अमुना | अदस् (३.१) | by this |
| दृष्टेन | दृष्ट (√दृश्+क्त, ३.१) | by the sight |
| एव | एव | just |
| मनः | मनस् (१.१) | the heart |
| हृतम् | हृत (√हृ+क्त, १.१) | was stolen |
| धृतिमुषा | धृतिमुष् (३.१) | by the composure-stealer |
| प्राणेश्वरेण | प्राणेश्वर (३.१) | by the lord of my life |
| अद्य | अद्य | today |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| तत् | तत् | so |
| केन | किम् (३.१) | by what |
| अत्र | अत्र | here |
| निरूप्यमाणनिपुणः | निरूप्यमाण (नि√रूप्+णिच्+शानच्)–निपुण (१.१) | clever in reasoning |
| मानः | मान (१.१) | pride |
| समाधीयताम् | समाधीयताम् (सम्+आ√धा +यक् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | be maintained |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जा | ता | नो | त्क | लि | का | स्त | नौ | न | लु | लि | तौ | गा | त्रं | न | रो | मा | ञ्चि | तं |
| व | क्त्रं | स्वे | द | क | णा | न्वि | तं | न | स | ह | सा | या | व | च्छ | ठे | ना | मु | ना |
| दृ | ष्टे | नै | व | म | नो | हृ | तं | धृ | ति | मु | षा | प्रा | णे | श्व | रे | णा | द्य | मे |
| त | त्के | ना | त्र | नि | रू | प्य | मा | ण | नि | पु | णो | मा | नः | स | मा | धी | य | ताम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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