लोलद्भ्रूलतया विपक्षदिगुपन्यासेऽवधूतं शिर-
स्तद्वृत्तान्तनिरीक्षणे कृतनमस्कारो विलक्षः स्थितः ।
कोपात्ताम्रकपोलभित्तिनि मुखे दृष्ट्या गतः पादयोर्
उत्सृष्टो गुरुसन्निधावपि विधिर्द्वाभ्यां न कालोचितः ॥
लोलद्भ्रूलतया विपक्षदिगुपन्यासेऽवधूतं शिर-
स्तद्वृत्तान्तनिरीक्षणे कृतनमस्कारो विलक्षः स्थितः ।
कोपात्ताम्रकपोलभित्तिनि मुखे दृष्ट्या गतः पादयोर्
उत्सृष्टो गुरुसन्निधावपि विधिर्द्वाभ्यां न कालोचितः ॥
स्तद्वृत्तान्तनिरीक्षणे कृतनमस्कारो विलक्षः स्थितः ।
कोपात्ताम्रकपोलभित्तिनि मुखे दृष्ट्या गतः पादयोर्
उत्सृष्टो गुरुसन्निधावपि विधिर्द्वाभ्यां न कालोचितः ॥
अन्वयः
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विपक्षदिगुपन्यासे (सति) लोलद्भ्रूलतया शिरः अवधूतम्। तद्वृत्तान्तनिरीक्षणे (सति) कृतनमस्कारः (सः) विलक्षः स्थितः। (तस्य) दृष्टिः कोपात् ताम्रकपोलभित्तिनि मुखे (स्थित्वा) पादयोः गता। गुरुसन्निधौ अपि द्वाभ्याम् कालोचितः विधिः न उत्सृष्टः।
Summary
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When the rival woman was mentioned, she shook her head with a quivering brow. To observe her reaction, he stood embarrassed, having offered a salutation. His gaze, which was on her face with cheeks red from anger, fell to her feet. Even in the presence of elders, the appropriate conduct was not abandoned by either of them.
पदच्छेदः
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| लोलत् | लोलत् (√लुल्+शतृ) | quivering |
| भ्रूलतया | भ्रूलता (३.१) | with her creeper-like brow |
| विपक्षदिगुपन्यासे | विपक्ष–दिक्–उपन्यास (७.१) | at the mention of the rival's direction |
| अवधूतम् | अवधूत (अव√धू+क्त, १.१) | was shaken |
| शिरः | शिरस् (१.१) | the head |
| तद्वृत्तान्तनिरीक्षणे | तद्–वृत्तान्त–निरीक्षण (७.१) | in observing that event |
| कृतनमस्कारः | कृत (√कृ+क्त)–नमस्कार (१.१) | he who had made a salutation |
| विलक्षः | विलक्ष (१.१) | embarrassed |
| स्थितः | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | stood |
| कोपात् | कोप (५.१) | from anger |
| ताम्रकपोलभित्तिनि | ताम्र–कपोल–भित्ति (७.१) | on the surface of her copper-like cheeks |
| मुखे | मुख (७.१) | on the face |
| दृष्ट्या | दृष्टि (३.१) | with a gaze |
| गतः | गत (√गम्+क्त, १.१) | went |
| पादयोः | पाद (७.२) | to the feet |
| उत्सृष्टः | उत्सृष्ट (उद्√सृज्+क्त, १.१) | abandoned |
| गुरुसन्निधौ | गुरु–सन्निधि (७.१) | in the presence of elders |
| अपि | अपि | even |
| विधिः | विधि (१.१) | the proper conduct |
| द्वाभ्याम् | द्वि (३.२) | by the two |
| न | न | not |
| कालोचितः | काल–उचित (१.१) | appropriate for the occasion |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लो | ल | द्भ्रू | ल | त | या | वि | प | क्ष | दि | गु | प | न्या | से | ऽव | धू | तं | शि | र |
| स्त | द्वृ | त्ता | न्त | नि | री | क्ष | णे | कृ | त | न | म | स्का | रो | वि | ल | क्षः | स्थि | तः |
| को | पा | त्ता | म्र | क | पो | ल | भि | त्ति | नि | मु | खे | दृ | ष्ट्या | ग | तः | पा | द | यो |
| रु | त्सृ | ष्टो | गु | रु | स | न्नि | धा | व | पि | वि | धि | र्द्वा | भ्यां | न | का | लो | चि | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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