यास्यामिति समुद्यतस्य गदितं विश्रब्धम् आकर्णितं
गच्छन्दूरमुपेक्षितो मुहुरसौ व्यावृत्य तिष्ठन्नपि ।
तच्छून्ये पुनरास्थितास्मि भवने प्राणास्त एते दृढाः
सख्यस्तिष्ठत जीवितव्यसनिनी दम्भादहं रोदिमि ॥
यास्यामिति समुद्यतस्य गदितं विश्रब्धम् आकर्णितं
गच्छन्दूरमुपेक्षितो मुहुरसौ व्यावृत्य तिष्ठन्नपि ।
तच्छून्ये पुनरास्थितास्मि भवने प्राणास्त एते दृढाः
सख्यस्तिष्ठत जीवितव्यसनिनी दम्भादहं रोदिमि ॥
गच्छन्दूरमुपेक्षितो मुहुरसौ व्यावृत्य तिष्ठन्नपि ।
तच्छून्ये पुनरास्थितास्मि भवने प्राणास्त एते दृढाः
सख्यस्तिष्ठत जीवितव्यसनिनी दम्भादहं रोदिमि ॥
अन्वयः
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(मया) “यास्यामि” इति समुद्यतस्य (प्रियस्य) गदितम् विश्रब्धम् आकर्णितम्। असौ गच्छन्, व्यावृत्य मुहुः तिष्ठन् अपि, दूरम् उपेक्षितः। तत् (पश्चात्) पुनः शून्ये भवने आस्थिता अस्मि। एते प्राणाः तु दृढाः। सख्यः, तिष्ठत। जीवितव्यसनिनी अहम् दम्भात् रोदिमि।
Summary
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A woman tells her friends: "When he was ready to leave, I confidently heard his words, 'I will go.' As he went, I ignored him, though he repeatedly turned back to look. Now I remain in this empty house. But these life-breaths of mine are stubborn. Friends, stay. I, who am addicted to living, weep only out of pretense."
पदच्छेदः
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| यास्यामि | यास्यामि (√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will go |
| इति | इति | thus |
| समुद्यतस्य | समुद्यत (सम्+उद्√यम्+क्त, ६.१) | of him who was ready |
| गदितम् | गदित (√गद्+क्त, १.१) | the utterance |
| विश्रब्धम् | विश्रब्धम् | confidently |
| आकर्णितम् | आकर्णित (आ√कर्ण्+क्त, १.१) | was heard |
| गच्छन् | गच्छत् (√गम्+शतृ, १.१) | while going |
| दूरम् | दूरम् | far |
| उपेक्षितः | उपेक्षित (उप√ईक्ष्+क्त, १.१) | was ignored |
| मुहुः | मुहुः | repeatedly |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| व्यावृत्य | व्यावृत्य (वि+आ√वृत्+ल्यप्) | having turned back |
| तिष्ठन् | तिष्ठत् (√स्था+शतृ, १.१) | while standing |
| अपि | अपि | even |
| तत् | तत् | then |
| शून्ये | शून्य (७.१) | in the empty |
| पुनः | पुनः | again |
| आस्थिता | आस्थित (आ√स्था+क्त, १.१) | I remain |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| भवने | भवन (७.१) | in the house |
| प्राणाः | प्राण (१.३) | life-breaths |
| तु | तु | but |
| एते | एतद् (१.३) | these |
| दृढाः | दृढ (१.३) | are stubborn |
| सख्यः | सखि (८.३) | O friends |
| तिष्ठत | तिष्ठत (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | stay |
| जीवितव्यसनिनी | जीवितव्यसनिन् (१.१) | I who am addicted to living |
| दम्भात् | दम्भ (५.१) | out of pretense |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| रोदिमि | रोदिमि (√रुद् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | weep |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | स्या | मि | ति | स | मु | द्य | त | स्य | ग | दि | तं | वि | श्र | ब्ध | मा | क | र्णि | तं |
| ग | च्छ | न्दू | र | मु | पे | क्षि | तो | मु | हु | र | सौ | व्या | वृ | त्य | ति | ष्ठ | न्न | पि |
| त | च्छू | न्ये | पु | न | रा | स्थि | ता | स्मि | भ | व | ने | प्रा | णा | स्त | ए | ते | दृ | ढाः |
| स | ख्य | स्ति | ष्ठ | त | जी | वि | त | व्य | स | नि | नी | द | म्भा | द | हं | रो | दि | मि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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