कथमपि कृतप्रत्याख्याने प्रिये स्खलितोत्तरे
विरहकृशया कृत्वा व्याजं प्रकल्पितमश्रुतं ।
असहनसखीश्रोत्रप्राप्तिप्रमादससंभ्रमं
विगलितदृशा शून्ये गेहे समुच्छ्वसितं पुनः ॥
कथमपि कृतप्रत्याख्याने प्रिये स्खलितोत्तरे
विरहकृशया कृत्वा व्याजं प्रकल्पितमश्रुतं ।
असहनसखीश्रोत्रप्राप्तिप्रमादससंभ्रमं
विगलितदृशा शून्ये गेहे समुच्छ्वसितं पुनः ॥
विरहकृशया कृत्वा व्याजं प्रकल्पितमश्रुतं ।
असहनसखीश्रोत्रप्राप्तिप्रमादससंभ्रमं
विगलितदृशा शून्ये गेहे समुच्छ्वसितं पुनः ॥
अन्वयः
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प्रिये स्खलित-उत्तरे (सति), कथम् अपि कृत-प्रत्याख्याने (सति च), विरह-कृशया (तया) व्याजं कृत्वा अश्रुतं प्रकल्पितम्। पुनः शून्ये गेहे विगलित-दृशा असहन-सखी-श्रोत्र-प्राप्ति-प्रमाद-ससंभ्रमम् समुच्छ्वसितम्।
Summary
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When her beloved, having been refused, gave a faltering reply, the woman, emaciated by separation, pretended not to have heard him. Later, alone in the empty house, she sighed with tearful eyes, agitated by the fear that her impatient friend might have overheard her mistake.
पदच्छेदः
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| कथमपि | कथमपि | Somehow, |
| कृतप्रत्याख्याने | कृत–प्रत्याख्यान (७.१) | when the refusal had been made, |
| प्रिये | प्रिय (७.१) | the beloved, |
| स्खलितोत्तरे | स्खलित–उत्तर (७.१) | gave a faltering reply, |
| विरहकृशया | विरह–कृशा (३.१) | by her, who was emaciated by separation, |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | making |
| व्याजं | व्याज (२.१) | a pretext, |
| प्रकल्पितम् | प्रकल्पित (प्र√कॢप्+णिच्+क्त, १.१) | it was pretended |
| अश्रुतं | अश्रुत (१.१) | not to have been heard. |
| असहनसखीश्रोत्रप्राप्तिप्रमादससंभ्रमं | असहन–सखी–श्रोत्र–प्राप्ति–प्रमाद–ससंभ्रमम् (२.१) | With agitation from the fear of the mistake reaching the ears of her impatient friend, |
| विगलितदृशा | विगलित–दृश् (३.१) | with tearful eyes, |
| शून्ये | शून्य (७.१) | in the empty |
| गेहे | गेह (७.१) | house, |
| समुच्छ्वसितं | समुच्छ्वसित (सम्+उद्√श्वस्+क्त, १.१) | it was sighed |
| पुनः | पुनर् | again. |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | थ | म | पि | कृ | त | प्र | त्या | ख्या | ने | प्रि | ये | स्ख | लि | तो | त्त | रे |
| वि | र | ह | कृ | श | या | कृ | त्वा | व्या | जं | प्र | क | ल्पि | त | म | श्रु | तं |
| अ | स | ह | न | स | खी | श्रो | त्र | प्रा | प्ति | प्र | मा | द | स | सं | भ्र | मं |
| वि | ग | लि | त | दृ | शा | शू | न्ये | गे | हे | स | मु | च्छ्व | सि | तं | पु | नः |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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