लीलातामरसाहतोऽन्यवनितानिःशङ्कदष्टाधरः
कश्चित्केसरदूषितेक्षण इव व्यामील्य नेत्रे स्थितः ।
मुग्धा कुड्मलिताननेन दधतो वायुं स्थिता तस्य सा
भ्रान्त्या धूर्ततया च वेपथुमती तेनानिशं चुम्बिता ॥
लीलातामरसाहतोऽन्यवनितानिःशङ्कदष्टाधरः
कश्चित्केसरदूषितेक्षण इव व्यामील्य नेत्रे स्थितः ।
मुग्धा कुड्मलिताननेन दधतो वायुं स्थिता तस्य सा
भ्रान्त्या धूर्ततया च वेपथुमती तेनानिशं चुम्बिता ॥
कश्चित्केसरदूषितेक्षण इव व्यामील्य नेत्रे स्थितः ।
मुग्धा कुड्मलिताननेन दधतो वायुं स्थिता तस्य सा
भ्रान्त्या धूर्ततया च वेपथुमती तेनानिशं चुम्बिता ॥
अन्वयः
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अन्य-वनिता-निःशङ्क-दष्ट-अधरः कश्चित् लीला-तामरस-आहतः (सन्) केसर-दूषित-ईक्षणः इव नेत्रे वि-आमील्य स्थितः। सा मुग्धा कुड्मलित-आननेन वायुं दधती तस्य (समीपे) स्थिता। भ्रान्त्या धूर्ततया च वेपथुमती सा तेन अनिशं चुम्बिता।
Summary
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A man, whose lip was bitten by another woman, was struck with a play-lotus by his beloved. He pretended his eyes were irritated by pollen and closed them. The innocent girl, believing him, puckered her lips to blow on his eyes. Taking advantage of her mistake, the cunning man kissed the trembling girl incessantly.
पदच्छेदः
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| लीलातामरसाहतः | लीला–तामरस–आहत (१.१) | Struck by a play-lotus, |
| अन्यवनितानिःशङ्कदष्टाधरः | अन्य–वनिता–निःशङ्क–दष्ट (√दष्ट+क्त)–अधर (१.१) | whose lip was unhesitatingly bitten by another woman, |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) | a certain man, |
| केसरदूषितेक्षणः | केसर–दूषित–ईक्षण (१.१) | whose eyes were irritated by pollen, |
| इव | इव | as if, |
| व्यामील्य | व्यामील्य (वि+आ√मील्+ल्यप्) | having closed |
| नेत्रे | नेत्र (२.२) | his two eyes, |
| स्थितः | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | stood. |
| मुग्धा | मुग्धा (१.१) | The simple girl, |
| कुड्मलिताननेन | कुड्मलित–आनन (३.१) | with a puckered mouth, |
| दधती | दधती (√धा+शतृ, १.१) | blowing |
| वायुं | वायु (२.१) | air, |
| स्थिता | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | stood |
| तस्य | तद् (६.१) | near him. |
| सा | तद् (१.१) | She, |
| भ्रान्त्या | भ्रान्ति (३.१) | due to her mistake |
| धूर्ततया | धूर्तता (३.१) | and his cunning, |
| च | च | and |
| वेपथुमती | वेपथुमत् (१.१) | trembling, |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| अनिशं | अनिशम् | incessantly |
| चुम्बिता | चुम्बित (√चुम्ब्+क्त, १.१) | was kissed. |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ली | ला | ता | म | र | सा | ह | तो | ऽन्य | व | नि | ता | निः | श | ङ्क | द | ष्टा | ध | रः |
| क | श्चि | त्के | स | र | दू | षि | ते | क्ष | ण | इ | व | व्या | मी | ल्य | ने | त्रे | स्थि | तः |
| मु | ग्धा | कु | ड्म | लि | ता | न | ने | न | द | ध | तो | वा | युं | स्थि | ता | त | स्य | सा |
| भ्रा | न्त्या | धू | र्त | त | या | च | वे | प | थु | म | ती | ते | ना | नि | शं | चु | म्बि | ता |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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