नार्यस्तन्वि हठाद्धरन्ति रमणं तिष्ठन्ति नो वारिता-
स्तत्किं ताम्यसि किं च रोदिषि मुधा तासां प्रियं मा कृथाः ।
कान्तः केलिरुचिर्युवा सहृदयस्तादृक्पतिः कातरे
किं नो बर्करकर्करैः प्रियशतैराक्रम्य विक्रीयते ॥
नार्यस्तन्वि हठाद्धरन्ति रमणं तिष्ठन्ति नो वारिता-
स्तत्किं ताम्यसि किं च रोदिषि मुधा तासां प्रियं मा कृथाः ।
कान्तः केलिरुचिर्युवा सहृदयस्तादृक्पतिः कातरे
किं नो बर्करकर्करैः प्रियशतैराक्रम्य विक्रीयते ॥
स्तत्किं ताम्यसि किं च रोदिषि मुधा तासां प्रियं मा कृथाः ।
कान्तः केलिरुचिर्युवा सहृदयस्तादृक्पतिः कातरे
किं नो बर्करकर्करैः प्रियशतैराक्रम्य विक्रीयते ॥
अन्वयः
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तन्वि, नार्यः हठात् रमणं हरन्ति, वारिताः (सत्यः) नो तिष्ठन्ति । तत् किं ताम्यसि? किं च मुधा रोदिषि? तासां प्रियं मा कृथाः । कातरे, कान्तः, केलि-रुचिः, युवा, सहृदयः, तादृक् पतिः बर्कर-कर्करैः प्रिय-शतैः आक्रम्य किं नो विक्रीयते?
Summary
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O slender one, other women forcibly steal a lover and don't stop even when prevented. So why are you distressed and weeping in vain? Don't give them that pleasure. O timid one, is not such a husband—charming, playful, young, and kind-hearted—worth being fought for and won over from hundreds of worthless rivals?
पदच्छेदः
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| नार्यः | नारी (१.३) | women |
| तन्वि | तन्वी (८.१) | O slender one |
| हठात् | हठ (५.१) | by force |
| हरन्ति | हरन्ति (√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | steal away |
| रमणम् | रमण (२.१) | the lover |
| तिष्ठन्ति | तिष्ठन्ति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | stop |
| नो | नो | not |
| वारिताः | वारित (√वृ+णिच्+क्त, १.३) | being prevented |
| तत् | तद् | therefore |
| किम् | किम् | why |
| ताम्यसि | ताम्यसि (√तम् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are you distressed |
| किम् | किम् | why |
| च | च | and |
| रोदिषि | रोदिषि (√रुद् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you weep |
| मुधा | मुधा | in vain |
| तासाम् | तद् (६.३) | their |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | pleasure |
| मा | मा | do not |
| कृथाः | कृथाः (√कृ कर्तरि लुङ् (आत्मने.) म.पु. एक.) | do |
| कान्तः | कान्त (१.१) | charming |
| केलि | केलि | sports |
| रुचिः | रुचि (१.१) | fond of |
| युवा | युवन् (१.१) | young |
| सहृदयः | सहृदय (१.१) | kind-hearted |
| तादृक् | तादृश् (१.१) | such a |
| पतिः | पति (१.१) | husband |
| कातरे | कातरा (८.१) | O timid one |
| किम् | किम् | why |
| नो | नो | not |
| बर्कर | बर्कर | worthless |
| कर्करैः | कर्कर (३.३) | rivals |
| प्रिय | प्रिय | lovers |
| शतैः | शत (३.३) | by hundreds of |
| आक्रम्य | आक्रम्य (आ√क्रम्+ल्यप्) | having been fought for |
| विक्रीयते | विक्रीयते (वि√क्री भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is won over |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | र्य | स्त | न्वि | ह | ठा | द्ध | र | न्ति | र | म | णं | ति | ष्ठ | न्ति | नो | वा | रि | ता |
| स्त | त्किं | ता | म्य | सि | किं | च | रो | दि | षि | मु | धा | ता | सां | प्रि | यं | मा | कृ | थाः |
| का | न्तः | के | लि | रु | चि | र्यु | वा | स | हृ | द | य | स्ता | दृ | क्प | तिः | का | त | रे |
| किं | नो | ब | र्क | र | क | र्क | रैः | प्रि | य | श | तै | रा | क्र | म्य | वि | क्री | य | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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