अन्वयः
AI
प्रिये सम्मुख-आयाते (सति) प्रियाणि वदति (सति च), मे सर्वाणि अङ्गानि श्रोत्रतां यान्ति, किम् उ नेत्रताम् (यान्ति इति) न जाने ।
Summary
AI
When my beloved comes before me and speaks sweet words, I do not know if all my limbs become ears to hear him or eyes to see him.
पदच्छेदः
AI
| न | न | Not |
| जाने | जाने (√ज्ञा कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I know |
| संमुखायाते | संमुखायात (सम्मुख+आ√या+क्त, ७.१) | when he has come face to face, |
| प्रियाणि | प्रिय (२.३) | sweet things |
| वदति | वदत् (√वद्+शतृ, ७.१) | while speaking, |
| प्रिये | प्रिय (७.१) | the beloved, |
| सर्वाणि | सर्व (१.३) | all |
| अङ्गानि | अङ्ग (१.३) | limbs |
| मे | अस्मद् (६.१) | of mine |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | become |
| श्रोत्रतां | श्रोत्रता (२.१) | ears |
| किमु | किम्–उ | or |
| नेत्रताम् | नेत्रता (२.१) | eyes. |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | जा | ने | सं | मु | खा | या | ते |
| प्रि | या | णि | व | द | ति | प्रि | ये |
| स | र्वा | ण्य | ङ्गा | नि | मे | या | न्ति |
| श्रो | त्र | तां | कि | मु | ने | त्र | ताम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.