लग्ना नांशुकपल्लवे भुजलता न द्वारदेशेऽर्पिता
नो वा पादतले तया निपतितं तिष्ठेति नोक्तं वचः ।
काले केवलमम्बुदातिमलिने गन्तुं प्रवृत्तः शठः
तन्व्या बाष्पजलौघकल्पितनदीपूरेण बद्धः प्रियः ॥
लग्ना नांशुकपल्लवे भुजलता न द्वारदेशेऽर्पिता
नो वा पादतले तया निपतितं तिष्ठेति नोक्तं वचः ।
काले केवलमम्बुदातिमलिने गन्तुं प्रवृत्तः शठः
तन्व्या बाष्पजलौघकल्पितनदीपूरेण बद्धः प्रियः ॥
नो वा पादतले तया निपतितं तिष्ठेति नोक्तं वचः ।
काले केवलमम्बुदातिमलिने गन्तुं प्रवृत्तः शठः
तन्व्या बाष्पजलौघकल्पितनदीपूरेण बद्धः प्रियः ॥
अन्वयः
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तया अंशुक-पल्लवे भुज-लता न लग्ना, द्वार-देशे न अर्पिता, वा पाद-तले न निपतितम्, तिष्ठ इति वचः न उक्तम्। केवलम् अम्बुद-अति-मलिने काले गन्तुम् प्रवृत्तः शठः प्रियः तन्व्या बाष्प-जल-ओघ-कल्पित-नदी-पूरेण बद्धः।
Summary
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She did not cling to his garment, block the door, or fall at his feet; she didn't even say "Stop!" Yet, as the rogue beloved tried to leave on a dark, cloudy day, he was stopped by a river-flood created from the stream of the slender woman's tears.
पदच्छेदः
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| लग्ना | लग्न (√लग्+क्त, १.१) | clung |
| न | न | not |
| अंशुकपल्लवे | अंशुक–पल्लव (७.१) | to the hem of his garment, |
| भुजलता | भुज–लता (१.१) | her creeper-like arm |
| न | न | not |
| द्वारदेशे | द्वार–देश (७.१) | at the doorway |
| अर्पिता | अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त, १.१) | was placed, |
| नो | न–उ | nor |
| वा | वा | or |
| पादतले | पाद–तल (७.१) | at his feet |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| निपतितम् | निपतित (नि√पत्+क्त, १.१) | was it fallen, |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | 'Stop!' |
| इति | इति | thus |
| न | न | not |
| उक्तं | उक्त (√वच्+क्त, १.१) | was spoken |
| वचः | वचस् (१.१) | a word. |
| काले | काल (७.१) | At a time |
| केवलम् | केवलम् | only |
| अम्बुदातिमलिने | अम्बुद–अति–मलिन (७.१) | very dark with clouds, |
| गन्तुं | गन्तुम् (√गम्+तुमुन्) | to go |
| प्रवृत्तः | प्रवृत्त (प्र√वृत्+क्त, १.१) | set out, |
| शठः | शठ (१.१) | the rogue |
| तन्व्या | तन्वी (३.१) | by the slender woman's |
| बाष्पजलौघकल्पितनदीपूरेण | बाष्प–जल–ओघ–कल्पित (√कल्पित+णिच्+क्त)–नदी–पूर (३.१) | by the flood of a river formed by the stream of her tears |
| बद्धः | बद्ध (√बन्ध्+क्त, १.१) | was bound |
| प्रियः | प्रिय (१.१) | the beloved. |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | ग्ना | नां | शु | क | प | ल्ल | वे | भु | ज | ल | ता | न | द्वा | र | दे | शे | ऽर्पि | ता |
| नो | वा | पा | द | त | ले | त | या | नि | प | ति | तं | ति | ष्ठे | ति | नो | क्तं | व | चः |
| का | ले | के | व | ल | म | म्बु | दा | ति | म | लि | ने | ग | न्तुं | प्र | वृ | त्तः | श | ठः |
| त | न्व्या | बा | ष्प | ज | लौ | घ | क | ल्पि | त | न | दी | पू | रे | ण | ब | द्धः | प्रि | यः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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