लोलैर्लोचनवारिभिः सशपथैः पादप्रणामैः प्रियैर्
अन्यास्ता विनिवारयन्ति कृपणाः प्राणेश्वरं प्रस्थितम् ।
पुण्याहं व्रज मङ्गलं सुदिवसं प्रातः प्रयातस्य ते
यत्स्नेहोचितमीहितं प्रियतम त्वं निर्गतः श्रोष्यसि ॥
लोलैर्लोचनवारिभिः सशपथैः पादप्रणामैः प्रियैर्
अन्यास्ता विनिवारयन्ति कृपणाः प्राणेश्वरं प्रस्थितम् ।
पुण्याहं व्रज मङ्गलं सुदिवसं प्रातः प्रयातस्य ते
यत्स्नेहोचितमीहितं प्रियतम त्वं निर्गतः श्रोष्यसि ॥
अन्यास्ता विनिवारयन्ति कृपणाः प्राणेश्वरं प्रस्थितम् ।
पुण्याहं व्रज मङ्गलं सुदिवसं प्रातः प्रयातस्य ते
यत्स्नेहोचितमीहितं प्रियतम त्वं निर्गतः श्रोष्यसि ॥
अन्वयः
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अन्याः कृपणाः ताः लोलैः लोचन-वारिभिः, स-शपथैः प्रियैः पाद-प्रणामैः प्रस्थितम् प्राण-ईश्वरम् वि-निवारयन्ति । (अहं तु वदामि) व्रज। पुण्याहम्, मङ्गलम्, सु-दिवसम् (अस्तु)। प्रियतम! प्रातः प्रयातस्य ते यत् स्नेह-उचितम् ईहितम् (अस्ति), त्वम् निर्गतः (सन्) श्रोष्यसि ।
Summary
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"Other pitiable women try to stop their departing beloveds with tears, oaths, and prostrations. But I say: Go! May your day be auspicious. O dearest, whatever loving message is appropriate, you will hear it after you have departed."
पदच्छेदः
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| लोलैः | लोल (३.३) | With trembling |
| लोचनवारिभिः | लोचन–वारि (३.३) | tears, |
| सशपथैः | स–शपथ (३.३) | with oaths, |
| पादप्रणामैः | पाद–प्रणाम (३.३) | and prostrations at the feet, |
| प्रियैः | प्रिय (३.३) | lovingly, |
| अन्याः | अन्य (१.३) | other |
| ताः | तद् (१.३) | women, |
| विनिवारयन्ति | विनिवारयन्ति (वि+नि+णिच्√वृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | restrain |
| कृपणाः | कृपणा (१.३) | pitiable ones, |
| प्राणेश्वरम् | प्राण–ईश्वर (२.१) | the lord of their life |
| प्रस्थितम् | प्रस्थित (प्र√स्था+क्त, २.१) | who is setting out. |
| पुण्याहम् | पुण्य–अहन् (१.१) | An auspicious day, |
| व्रज | व्रज (√व्रज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Go. |
| मङ्गलम् | मङ्गल (१.१) | a blessing, |
| सुदिवसम् | सु–दिवस (१.१) | a good day (be unto you). |
| प्रातः | प्रातर् | In the morning, |
| प्रयातस्य | प्रयात (प्र√या+क्त, ६.१) | of you who has departed, |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| यत् | यद् (१.१) | whatever |
| स्नेहोचितम् | स्नेह–उचित (१.१) | is appropriate for love, |
| ईहितम् | ईहित (√ईह्+क्त, १.१) | is intended, |
| प्रियतम | प्रियतम (८.१) | O most beloved, |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you, |
| निर्गतः | निर्गत (निर्√गम्+क्त, १.१) | having departed, |
| श्रोष्यसि | श्रोष्यसि (√श्रु कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will hear. |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लो | लै | र्लो | च | न | वा | रि | भिः | स | श | प | थैः | पा | द | प्र | णा | मैः | प्रि | यै |
| र | न्या | स्ता | वि | नि | वा | र | य | न्ति | कृ | प | णाः | प्रा | णे | श्व | रं | प्र | स्थि | तम् |
| पु | ण्या | हं | व्र | ज | म | ङ्ग | लं | सु | दि | व | सं | प्रा | तः | प्र | या | त | स्य | ते |
| य | त्स्ने | हो | चि | त | मी | हि | तं | प्रि | य | त | म | त्वं | नि | र्ग | तः | श्रो | ष्य | सि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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