श्रुत्वा तन्व्या निशीथे नवघनरसितं विश्लथाङ्कं पतित्वा
शय्यायां भूमिपृष्ठे करतलधृतया दुःखितालीजनेन ।
सोत्कण्ठं मुक्तकण्ठं कठिनकुचतटाघातशीर्णाश्रुबिन्दु
स्मृत्वा स्मृत्वा प्रियस्य स्खलितमृदुवचो रुद्यते पान्थवध्वा ॥
श्रुत्वा तन्व्या निशीथे नवघनरसितं विश्लथाङ्कं पतित्वा
शय्यायां भूमिपृष्ठे करतलधृतया दुःखितालीजनेन ।
सोत्कण्ठं मुक्तकण्ठं कठिनकुचतटाघातशीर्णाश्रुबिन्दु
स्मृत्वा स्मृत्वा प्रियस्य स्खलितमृदुवचो रुद्यते पान्थवध्वा ॥
शय्यायां भूमिपृष्ठे करतलधृतया दुःखितालीजनेन ।
सोत्कण्ठं मुक्तकण्ठं कठिनकुचतटाघातशीर्णाश्रुबिन्दु
स्मृत्वा स्मृत्वा प्रियस्य स्खलितमृदुवचो रुद्यते पान्थवध्वा ॥
अन्वयः
AI
निशीथे नव-घन-रसितं श्रुत्वा, शय्यायाम् विश्लथ-अङ्गम् पतित्वा, भूमि-पृष्ठे दुःखित-आलि-जनेन कर-तल-धृतया तन्व्या पान्थ-वध्वा, प्रियस्य स्खलित-मृदु-वचः स्मृत्वा स्मृत्वा, स-उत्कण्ठम्, मुक्त-कण्ठम्, कठिन-कुच-तट-आघात-शीर्ण-अश्रु-बिन्दु (यथा स्यात् तथा) रुद्यते ।
Summary
AI
Hearing a new cloud rumble at midnight, the traveler's wife falls from her bed. Supported by her friends, she repeatedly remembers her beloved's sweet, faltering words and weeps longingly and loudly, her tears shattering against her hard breasts.
पदच्छेदः
AI
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | Having heard |
| तन्व्या | तन्वी (३.१) | by the slender woman, |
| निशीथे | निशीथ (७.१) | at midnight, |
| नवघनरसितम् | नव–घन–रसित (२.१) | the rumbling of a new cloud, |
| विश्लथाङ्गम् | विश्लथ–अङ्गम् (२.१) | with loosened limbs |
| पतित्वा | पतित्वा (√पत्+क्त्वा) | having fallen |
| शय्यायाम् | शय्या (७.१) | from the bed |
| भूमिपृष्ठे | भूमि–पृष्ठ (७.१) | onto the ground, |
| करतलधृतया | कर–तल–धृत (३.१) | supported by the hands |
| दुःखितालीजनेन | दुःखित–आलि–जन (३.१) | of her grieving friends, |
| सोत्कण्ठम् | स–उत्कण्ठम् (२.१) | longingly, |
| मुक्तकण्ठम् | मुक्त–कण्ठम् (२.१) | loudly, |
| कठिनकुचतटाघातशीर्णाश्रुबिन्दु | कठिन–कुच–तट–आघात–शीर्ण (√शीर्ण+क्त)–अश्रु–बिन्दु (२.१) | so that her teardrops shatter upon striking her hard breasts, |
| स्मृत्वा | स्मृत्वा (√स्मृ+क्त्वा) | remembering |
| स्मृत्वा | स्मृत्वा (√स्मृ+क्त्वा) | again and again |
| प्रियस्य | प्रिय (६.१) | her beloved's |
| स्खलितमृदुवचः | स्खलित–मृदु–वचस् (२.१) | faltering, sweet words, |
| रुद्यते | रुद्यते (√रुद् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it is wept |
| पान्थवध्वा | पान्थ–वधू (३.१) | by the traveler's wife. |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रु | त्वा | त | न्व्या | नि | शी | थे | न | व | घ | न | र | सि | तं | वि | श्ल | था | ङ्कं | प | ति | त्वा |
| श | य्या | यां | भू | मि | पृ | ष्ठे | क | र | त | ल | धृ | त | या | दुः | खि | ता | ली | ज | ने | न |
| सो | त्क | ण्ठं | मु | क्त | क | ण्ठं | क | ठि | न | कु | च | त | टा | घा | त | शी | र्णा | श्रु | बि | न्दु |
| स्मृ | त्वा | स्मृ | त्वा | प्रि | य | स्य | स्ख | लि | त | मृ | दु | व | चो | रु | द्य | ते | पा | न्थ | व | ध्वा |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.