अङ्गानामतितानवं कथमिदं कम्पश्च कस्मात्कुतो
मुग्धे पाण्डुकपोलमाननमिति प्राणेश्वरे पृच्छति ।
तन्व्या सर्वमिदं स्वभावजमिति व्याहृत्य पक्ष्मान्तर-
व्यापी बाष्पभरस्तया चलितया निःश्वस्य मुक्तोऽन्यतः ॥
अङ्गानामतितानवं कथमिदं कम्पश्च कस्मात्कुतो
मुग्धे पाण्डुकपोलमाननमिति प्राणेश्वरे पृच्छति ।
तन्व्या सर्वमिदं स्वभावजमिति व्याहृत्य पक्ष्मान्तर-
व्यापी बाष्पभरस्तया चलितया निःश्वस्य मुक्तोऽन्यतः ॥
मुग्धे पाण्डुकपोलमाननमिति प्राणेश्वरे पृच्छति ।
तन्व्या सर्वमिदं स्वभावजमिति व्याहृत्य पक्ष्मान्तर-
व्यापी बाष्पभरस्तया चलितया निःश्वस्य मुक्तोऽन्यतः ॥
अन्वयः
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प्राणेश्वरे "मुग्धे, इदम् अङ्गानाम् अतितानवं कथम्? कम्पश्च कस्मात्? कुतः आननम् पाण्डुकपोलम्?" इति पृच्छति (सति), तन्व्या "इदं सर्वं स्वभावजम्" इति व्याहृत्य, चलितया तया अन्यतः निःश्वस्य पक्ष्मान्तरव्यापी बाष्पभरः मुक्तः ।
Summary
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When her beloved asked, "O simple one, why this extreme thinness of your limbs? Why this trembling? Why is your face with pale cheeks?", the slender lady replied, "All this is natural." Then, turning away, she sighed and released a flood of tears that filled her eyelashes.
पदच्छेदः
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| अङ्गानाम् | अङ्ग (६.३) | of the limbs |
| अतितानवम् | अतितानव (१.१) | extreme thinness |
| कथम् | कथम् | why |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| कम्पः | कम्प (१.१) | trembling |
| च | च | and |
| कस्मात् | किम् (५.१) | why |
| कुतः | कुतस् | why |
| मुग्धे | मुग्धा (८.१) | O simple one |
| पाण्डुकपोलम् | पाण्डुकपोल (१.१) | with pale cheeks |
| आननम् | आनन (१.१) | your face |
| इति | इति | thus |
| प्राणेश्वरे | प्राणेश्वर (७.१) | her beloved |
| पृच्छति | पृच्छत् (√प्रछ्+शतृ, ७.१) | when asking |
| तन्व्या | तन्वी (३.१) | by the slender lady |
| सर्वम् | सर्व (१.१) | all |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| स्वभावजम् | स्वभावज (१.१) | is natural |
| इति | इति | thus |
| व्याहृत्य | व्याहृत्य (वि+आ√हृ+ल्यप्) | having replied |
| पक्ष्मान्तरव्यापी | पक्ष्मान्तरव्यापिन् (१.१) | filling her eyelashes |
| बाष्पभरः | बाष्पभर (१.१) | a flood of tears |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| चलितया | चलित (√चल्+क्त, ३.१) | turning away |
| निःश्वस्य | निःश्वस्य (निस्√श्वस्+ल्यप्) | having sighed |
| मुक्तः | मुक्त (√मुच्+क्त, १.१) | was released |
| अन्यतः | अन्यतस् | aside |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ङ्गा | ना | म | ति | ता | न | वं | क | थ | मि | दं | क | म्प | श्च | क | स्मा | त्कु | तो |
| मु | ग्धे | पा | ण्डु | क | पो | ल | मा | न | न | मि | ति | प्रा | णे | श्व | रे | पृ | च्छ | ति |
| त | न्व्या | स | र्व | मि | दं | स्व | भा | व | ज | मि | ति | व्या | हृ | त्य | प | क्ष्मा | न्त | र |
| व्या | पी | बा | ष्प | भ | र | स्त | या | च | लि | त | या | निः | श्व | स्य | मु | क्तो | ऽन्य | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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