आशङ्क्य प्रणतिं पटान्तपिहितौ पादौ करोत्यादरा-
त्व्याजेनागतमावृणोति हसितं न स्पष्टमुद्वीक्षते ।
मय्यालापवति प्रतीपवचनं सख्या सहाभाषते
तस्यास्तिष्ठतु निर्भरप्रणयिता मानोऽपि रम्योदयः ॥
आशङ्क्य प्रणतिं पटान्तपिहितौ पादौ करोत्यादरा-
त्व्याजेनागतमावृणोति हसितं न स्पष्टमुद्वीक्षते ।
मय्यालापवति प्रतीपवचनं सख्या सहाभाषते
तस्यास्तिष्ठतु निर्भरप्रणयिता मानोऽपि रम्योदयः ॥
त्व्याजेनागतमावृणोति हसितं न स्पष्टमुद्वीक्षते ।
मय्यालापवति प्रतीपवचनं सख्या सहाभाषते
तस्यास्तिष्ठतु निर्भरप्रणयिता मानोऽपि रम्योदयः ॥
अन्वयः
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(सा) प्रणतिम् आशङ्क्य आदरात् पटान्तपिहितौ पादौ करोति । व्याजेन आगतम् हसितम् आवृणोति । स्पष्टम् न उद्वीक्षते । मयि आलापवति (सति), सख्या सह प्रतीपवचनम् भाषते । तस्याः निर्भरप्रणयिता तिष्ठतु, मानः अपि रम्योदयः (अस्ति) ।
Summary
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Fearing my prostration, she respectfully covers her feet with the edge of her garment. She conceals a smile that appears under some pretext. She does not look at me clearly. When I speak, she says contrary things to her friend. Let her deep love be, even her anger has a charming beginning.
पदच्छेदः
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| आशङ्क्य | आशङ्क्य (आ√शङ्क्+ल्यप्) | Fearing |
| प्रणतिम् | प्रणति (२.१) | prostration |
| पटान्तपिहितौ | पटान्तपिहित (२.२) | covered by the edge of her garment |
| पादौ | पाद (२.२) | her feet |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she makes |
| आदरात् | आदर (५.१) | respectfully |
| व्याजेन | व्याज (३.१) | under a pretext |
| आगतम् | आगत (आ√गम्+क्त, २.१) | that has come |
| आवृणोति | आवृणोति (आ√वृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she conceals |
| हसितम् | हसित (२.१) | a smile |
| न | न | not |
| स्पष्टम् | स्पष्टम् | clearly |
| उद्वीक्षते | उद्वीक्षते (उद्√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she looks |
| मयि | अस्मद् (७.१) | When I |
| आलापवति | आलापवत् (७.१) | am speaking |
| प्रतीपवचनम् | प्रतीपवचन (२.१) | contrary words |
| सख्या | सखि (३.१) | to her friend |
| सह | सह | with |
| आभाषते | आभाषते (आ√भाष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she speaks |
| तस्याः | तद् (६.१) | Her |
| तिष्ठतु | तिष्ठतु (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| निर्भरप्रणयिता | निर्भरप्रणयिता (१.१) | deep love |
| मानः | मान (१.१) | anger |
| अपि | अपि | even |
| रम्योदयः | रम्योदय (१.१) | has a charming beginning |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | श | ङ्क्य | प्र | ण | तिं | प | टा | न्त | पि | हि | तौ | पा | दौ | क | रो | त्या | द | रा |
| त्व्या | जे | ना | ग | त | मा | वृ | णो | ति | ह | सि | तं | न | स्प | ष्ट | मु | द्वी | क्ष | ते |
| म | य्या | ला | प | व | ति | प्र | ती | प | व | च | नं | स | ख्या | स | हा | भा | ष | ते |
| त | स्या | स्ति | ष्ठ | तु | नि | र्भ | र | प्र | ण | यि | ता | मा | नो | ऽपि | र | म्यो | द | यः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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