दीर्घा वन्दनमालिका विरचिता हृष्ट्यैव नेन्दीवरैः
पुष्पाणां प्रकरः स्मितेन रचितो नो कुन्दजात्यादिभिः ।
दत्तः स्वेदमुचा पयोधरयुगे नार्घ्यो न कुम्भाम्भसा
स्वैरेवावयवैः प्रियस्य विशतस्तन्व्या कृतं मङ्गलम् ॥
दीर्घा वन्दनमालिका विरचिता हृष्ट्यैव नेन्दीवरैः
पुष्पाणां प्रकरः स्मितेन रचितो नो कुन्दजात्यादिभिः ।
दत्तः स्वेदमुचा पयोधरयुगे नार्घ्यो न कुम्भाम्भसा
स्वैरेवावयवैः प्रियस्य विशतस्तन्व्या कृतं मङ्गलम् ॥
पुष्पाणां प्रकरः स्मितेन रचितो नो कुन्दजात्यादिभिः ।
दत्तः स्वेदमुचा पयोधरयुगे नार्घ्यो न कुम्भाम्भसा
स्वैरेवावयवैः प्रियस्य विशतस्तन्व्या कृतं मङ्गलम् ॥
अन्वयः
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प्रियस्य विशतः (सति), तन्व्या दृष्ट्या एव दीर्घा वन्दनमालिका विरचिता, न इन्दीवरैः । स्मितेन पुष्पाणाम् प्रकरः रचितः, न उ कुन्द जात्या आदिभिः । स्वेद मुचा पयोधर युगे अर्घ्यः दत्तः, न कुम्भ अम्भसा । (एवम्) स्वैः एव अवयवैः मङ्गलम् कृतम् ।
Summary
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As her beloved entered, the slender lady performed the auspicious welcoming ceremony with her own body parts. A long festive garland was created by her glance alone, not with blue lotuses. A heap of flowers was made by her smile, not with jasmine and others. A respectful offering was given by her perspiring breasts, not with water from a pitcher.
पदच्छेदः
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| दीर्घा | दीर्घा (१.१) | A long |
| वन्दनमालिका | वन्दनमालिका (१.१) | festive garland |
| विरचिता | विरचित (वि√रच्+क्त, १.१) | was created |
| दृष्ट्या | दृष्टि (३.१) | by her glance |
| एव | एव | alone |
| न | न | not |
| इन्दीवरैः | इन्दीवर (३.३) | with blue lotuses |
| पुष्पाणाम् | पुष्प (६.३) | of flowers |
| प्रकरः | प्रकर (१.१) | a heap |
| स्मितेन | स्मित (३.१) | by her smile |
| रचितः | रचित (√रच्+क्त, १.१) | was made |
| नो | न–उ | and not |
| कुन्दजात्यादिभिः | कुन्दजात्यादि (३.३) | with jasmine and other flowers |
| दत्तः | दत्त (√दा+क्त, १.१) | was given |
| स्वेदमुचा | स्वेदमुच् (३.२) | by the perspiring |
| पयोधरयुगे | पयोधरयुग (३.२) | pair of breasts |
| न | न | not |
| अर्घ्यः | अर्घ्य (१.१) | a respectful offering |
| न | न | not |
| कुम्भाम्भसा | कुम्भाम्भस् (३.१) | with water from a pitcher |
| स्वैः | स्व (३.३) | with her own |
| एव | एव | very |
| अवयवैः | अवयव (३.३) | limbs |
| प्रियस्य | प्रिय (६.१) | of her beloved |
| विशतः | विशत् (√विश्+शतृ, ६.१) | who was entering |
| तन्व्या | तन्वी (३.१) | by the slender lady |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was performed |
| मङ्गलम् | मङ्गल (१.१) | the auspicious ceremony |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दी | र्घा | व | न्द | न | मा | लि | का | वि | र | चि | ता | हृ | ष्ट्यै | व | ने | न्दी | व | रैः |
| पु | ष्पा | णां | प्र | क | रः | स्मि | ते | न | र | चि | तो | नो | कु | न्द | जा | त्या | दि | भिः |
| द | त्तः | स्वे | द | मु | चा | प | यो | ध | र | यु | गे | ना | र्घ्यो | न | कु | म्भा | म्भ | सा |
| स्वै | रे | वा | व | य | वैः | प्रि | य | स्य | वि | श | त | स्त | न्व्या | कृ | तं | म | ङ्ग | लम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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