गते प्रेमाबन्धे प्रणयबहुमाने विगलिते
निवृत्ते सद्भावे जन इव जने गच्छति पुरः ।
तद् उत्प्रेक्ष्योत्प्रेक्ष्य प्रियसखि गतांस्तांश्च दिवसा-
न्न जाने को हेतुर्दलति शतधा यन्न हृदयम् ॥
गते प्रेमाबन्धे प्रणयबहुमाने विगलिते
निवृत्ते सद्भावे जन इव जने गच्छति पुरः ।
तद् उत्प्रेक्ष्योत्प्रेक्ष्य प्रियसखि गतांस्तांश्च दिवसा-
न्न जाने को हेतुर्दलति शतधा यन्न हृदयम् ॥
निवृत्ते सद्भावे जन इव जने गच्छति पुरः ।
तद् उत्प्रेक्ष्योत्प्रेक्ष्य प्रियसखि गतांस्तांश्च दिवसा-
न्न जाने को हेतुर्दलति शतधा यन्न हृदयम् ॥
अन्वयः
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प्रियसखि, प्रेम आबन्धे गते (सति), प्रणय बहुमाने विगलिते (सति), सद्भावे निवृत्ते (सति), जने जन इव पुरः गच्छति (सति), तान् च गतान् दिवसान् उत्प्रेक्ष्य उत्प्रेक्ष्य, हृदयम् यत् शतधा न दलति, (तत्र) कः हेतुः, (अहम्) न जाने ।
Summary
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"O dear friend, with the bond of love gone, affectionate respect slipped away, and good feelings ceased, as he now passes before me like a stranger, I repeatedly recall those past days. I do not know the reason why my heart does not break into a hundred pieces."
पदच्छेदः
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| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | when gone |
| प्रेमाबन्धे | प्रेमाबन्ध (७.१) | the bond of love |
| प्रणयबहुमाने | प्रणयबहुमान (७.१) | affectionate respect |
| विगलिते | विगलित (वि√गल्+क्त, ७.१) | when slipped away |
| निवृत्ते | निवृत्त (नि√वृत्+क्त, ७.१) | when ceased |
| सद्भावे | सद्भाव (७.१) | good feeling |
| जन | जन (१.१) | a person |
| इव | इव | like |
| जने | जन (७.१) | a stranger |
| गच्छति | गच्छत् (√गम्+शतृ, ७.१) | when going |
| पुरः | पुरस् | before me |
| तत् | तद् | therefore |
| उत्प्रेक्ष्य | उत्प्रेक्ष्य (उद्+प्र√ईक्ष्+ल्यप्) | having imagined |
| उत्प्रेक्ष्य | उत्प्रेक्ष्य (उद्+प्र√ईक्ष्+ल्यप्) | again and again |
| प्रियसखि | प्रियसखि (८.१) | O dear friend |
| गतान् | गत (√गम्+क्त, २.३) | past |
| तान् | तद् (२.३) | those |
| च | च | and |
| दिवसान् | दिवस (२.३) | days |
| न | न | not |
| जाने | जाने (√ज्ञा कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I know |
| कः | किम् (१.१) | what |
| हेतुः | हेतु (१.१) | is the reason |
| दलति | दलति (√दल् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | breaks |
| शतधा | शतधा | into a hundred pieces |
| यत् | यद् | that |
| न | न | not |
| हृदयम् | हृदय (१.१) | my heart |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | ते | प्रे | मा | ब | न्धे | प्र | ण | य | ब | हु | मा | ने | वि | ग | लि | ते |
| नि | वृ | त्ते | स | द्भा | वे | ज | न | इ | व | ज | ने | ग | च्छ | ति | पु | रः |
| त | दु | त्प्रे | क्ष्यो | त्प्रे | क्ष्य | प्रि | य | स | खि | ग | तां | स्तां | श्च | दि | व | सा |
| न्न | जा | ने | को | हे | तु | र्द | ल | ति | श | त | धा | य | न्न | हृ | द | यम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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