पटालग्ने पत्यौ नमयति मुखं जातविनया
हठाश्लेषं वाञ्छत्यपहरति गात्राणि निभृतम् ।
न शक्नोत्याख्यातुं स्मितमुखसखीदत्तनयना
ह्रिया ताम्यत्यन्तः प्रथमपरिहासे नववधूः ॥
पटालग्ने पत्यौ नमयति मुखं जातविनया
हठाश्लेषं वाञ्छत्यपहरति गात्राणि निभृतम् ।
न शक्नोत्याख्यातुं स्मितमुखसखीदत्तनयना
ह्रिया ताम्यत्यन्तः प्रथमपरिहासे नववधूः ॥
हठाश्लेषं वाञ्छत्यपहरति गात्राणि निभृतम् ।
न शक्नोत्याख्यातुं स्मितमुखसखीदत्तनयना
ह्रिया ताम्यत्यन्तः प्रथमपरिहासे नववधूः ॥
अन्वयः
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प्रथम परिहासे, पत्यौ पट लग्ने (सति), नववधूः जात विनया (सती) मुखम् नमयति । (पत्यौ) हठ आश्लेषम् वाञ्छति (सति), निभृतम् गात्राणि अपहरति । स्मित मुख सखी दत्त नयना (सती) आख्यातुम् न शक्नोति । अन्तः ह्रिया ताम्यति ।
Summary
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During the first playful jest, the new bride, becoming modest, bends her face down when her husband clings to her garment. When he desires a forceful embrace, she gently draws her limbs back. With her eyes fixed on her smiling friend, she is unable to speak and is inwardly distressed with shyness.
पदच्छेदः
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| पटालग्ने | पटलग्न (७.१) | clinging to the garment |
| पत्यौ | पति (७.१) | when the husband |
| नमयति | नमयति (√नम् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bends down |
| मुखम् | मुख (२.१) | her face |
| जातविनया | जातविनय (१.१) | becoming modest |
| हठाश्लेषम् | हठाश्लेष (२.१) | a forceful embrace |
| वाञ्छति | वाञ्छति (√वाञ्छ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| अपहरति | अपहरति (अप√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | draws back |
| गात्राणि | गात्र (२.३) | her limbs |
| निभृतम् | निभृतम् | gently |
| न | न | not |
| शक्नोति | शक्नोति (√शक् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is able |
| आख्यातुम् | आख्यातुम् (आ√ख्या+तुमुन्) | to speak |
| स्मितमुख | स्मितमुख | smiling-faced |
| सखी | सखि | friend |
| दत्तनयना | दत्तनयन (१.१) | with her eyes fixed on |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | with shyness |
| ताम्यति | ताम्यति (√तम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is distressed |
| अन्तः | अन्तर् | inwardly |
| प्रथमपरिहासे | प्रथमपरिहास (७.१) | during the first playful jest |
| नववधूः | नववधू (१.१) | the new bride |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | टा | ल | ग्ने | प | त्यौ | न | म | य | ति | मु | खं | जा | त | वि | न | या |
| ह | ठा | श्ले | षं | वा | ञ्छ | त्य | प | ह | र | ति | गा | त्रा | णि | नि | भृ | तम् |
| न | श | क्नो | त्या | ख्या | तुं | स्मि | त | मु | ख | स | खी | द | त्त | न | य | ना |
| ह्रि | या | ता | म्य | त्य | न्तः | प्र | थ | म | प | रि | हा | से | न | व | व | धूः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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