कोपो यत्र भ्रूकुटिरचना निग्रहो यत्र मौनं
यत्रान्योन्यस्मितमनुनयो यत्र दृष्टिः प्रसादः ।
तस्य प्रेम्णस्तद् इदमधुना वैषमं पश्य जातं
त्वं पादान्ते लुठसि नहि मे मन्युमोक्षः खलायाः ॥
कोपो यत्र भ्रूकुटिरचना निग्रहो यत्र मौनं
यत्रान्योन्यस्मितमनुनयो यत्र दृष्टिः प्रसादः ।
तस्य प्रेम्णस्तद् इदमधुना वैषमं पश्य जातं
त्वं पादान्ते लुठसि नहि मे मन्युमोक्षः खलायाः ॥
यत्रान्योन्यस्मितमनुनयो यत्र दृष्टिः प्रसादः ।
तस्य प्रेम्णस्तद् इदमधुना वैषमं पश्य जातं
त्वं पादान्ते लुठसि नहि मे मन्युमोक्षः खलायाः ॥
अन्वयः
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यत्र कोपः भ्रूकुटि रचना (आसीत्), यत्र निग्रहः मौनम् (आसीत्), यत्र अनुनयः अन्योन्य स्मितम् (आसीत्), यत्र प्रसादः दृष्टिः (आसीत्), तस्य प्रेम्णः अधुना तत् इदम् वैषमम् जातम् पश्य । त्वम् पाद अन्ते लुठसि, (किन्तु) खलायाः मे मन्यु मोक्षः न हि (भवति) ।
Summary
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"See this reversal that has now come upon that love where anger was just a frown, punishment was silence, appeasement was a mutual smile, and favor was a mere glance. Now, you are rolling at my feet, yet my anger, cruel as I am, is not appeased."
पदच्छेदः
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| कोपः | कोप (१.१) | anger |
| यत्र | यत्र | where |
| भ्रूकुटिरचना | भ्रूकुटिरचना (१.१) | was the knitting of eyebrows |
| निग्रहः | निग्रह (१.१) | punishment |
| यत्र | यत्र | where |
| मौनम् | मौन (१.१) | was silence |
| यत्र | यत्र | where |
| अन्योन्य | अन्योन्य | mutual |
| स्मितम् | स्मित (१.१) | smile |
| अनुनयः | अनुनय (१.१) | was appeasement |
| यत्र | यत्र | where |
| दृष्टिः | दृष्टि (१.१) | a glance |
| प्रसादः | प्रसाद (१.१) | was favor |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| प्रेम्णः | प्रेमन् (६.१) | love |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| अधुना | अधुना | now |
| वैषमम् | वैषम (१.१) | reversal |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | see |
| जातम् | जात (√जन्+क्त, १.१) | has become |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | You |
| पादान्ते | पादान्त (७.१) | at my feet |
| लुठसि | लुठसि (√लुठ् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are rolling |
| न | न | not |
| हि | हि | indeed |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| मन्युमोक्षः | मन्युमोक्ष (१.१) | release from anger |
| खलायाः | खला (६.१) | of me, the cruel one |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | पो | य | त्र | भ्रू | कु | टि | र | च | ना | नि | ग्र | हो | य | त्र | मौ | नं |
| य | त्रा | न्यो | न्य | स्मि | त | म | नु | न | यो | य | त्र | दृ | ष्टिः | प्र | सा | दः |
| त | स्य | प्रे | म्ण | स्त | दि | द | म | धु | ना | वै | ष | मं | प | श्य | जा | तं |
| त्वं | पा | दा | न्ते | लु | ठ | सि | न | हि | मे | म | न्यु | मो | क्षः | ख | ला | याः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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