संदष्टाधरपल्लवा सचकितं हस्ताग्रम् आधुन्वती
मामामुञ्च शठेति कोपवचनैर् आनर्तितभ्रूलता ।
शीत्काराञ्चितलोचना सरभसं यैश्चुम्बिता मानिनी
प्राप्तं तैरमृतं मुधैव मथितो मूढैः सुरैः सागरः ॥
संदष्टाधरपल्लवा सचकितं हस्ताग्रम् आधुन्वती
मामामुञ्च शठेति कोपवचनैर् आनर्तितभ्रूलता ।
शीत्काराञ्चितलोचना सरभसं यैश्चुम्बिता मानिनी
प्राप्तं तैरमृतं मुधैव मथितो मूढैः सुरैः सागरः ॥
मामामुञ्च शठेति कोपवचनैर् आनर्तितभ्रूलता ।
शीत्काराञ्चितलोचना सरभसं यैश्चुम्बिता मानिनी
प्राप्तं तैरमृतं मुधैव मथितो मूढैः सुरैः सागरः ॥
अन्वयः
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यैः संदष्ट अधर पल्लवा, सचकितम् हस्त अग्रम् आधुन्वती, "शठ, माम् आमुञ्च" इति कोप वचनैः आनर्तित भ्रूलता, शीत्कार अञ्चित लोचना मानिनी सरभसम् चुम्बिता, तैः अमृतम् प्राप्तम् । मूढैः सुरैः सागरः मुधा एव मथितः ।
Summary
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Those who forcefully kissed the proud lady—as she bit her sprout-like lip, fearfully shook her fingertips, her creeper-like eyebrows dancing with angry words like "Release me, rogue!", and her eyes curved with a hissing sound—they have obtained nectar. The foolish gods churned the ocean in vain.
पदच्छेदः
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| संदष्ट | संदष्ट (सम्√दंश्+क्त) | bitten |
| अधरपल्लवा | अधरपल्लव (१.१) | whose sprout-like lip |
| सचकितम् | सचकितम् | fearfully |
| हस्ताग्रम् | हस्ताग्र (२.१) | her fingertips |
| आधुन्वती | आधुन्वती (आ√धू+शतृ, १.१) | shaking |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| आमुञ्च | आमुञ्च (आ√मुच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Release |
| शठ | शठ (८.१) | O rogue |
| इति | इति | thus |
| कोपवचनैः | कोपवचन (३.३) | with angry words |
| आनर्तित | आनर्तित (आ√नृत्+णिच्+क्त) | made to dance |
| भ्रूलता | भ्रूलता (१.१) | whose creeper-like eyebrow |
| शीत्कार | शीत्कार | hissing sound |
| अञ्चित | अञ्चित (√अञ्च्+क्त) | curved |
| लोचना | लोचन (१.१) | whose eyes |
| सरभसम् | सरभसम् | forcefully |
| यैः | यद् (३.३) | by whom |
| चुम्बिता | चुम्बित (√चुम्ब्+क्त, १.१) | was kissed |
| मानिनी | मानिनी (१.१) | the proud lady |
| प्राप्तम् | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, १.१) | was obtained |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| अमृतम् | अमृत (१.१) | nectar |
| मुधा | मुधा | in vain |
| एव | एव | only |
| मथितः | मथित (√मन्थ्+क्त, १.१) | was churned |
| मूढैः | मूढ (३.३) | by the foolish |
| सुरैः | सुर (३.३) | gods |
| सागरः | सागर (१.१) | the ocean |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | द | ष्टा | ध | र | प | ल्ल | वा | स | च | कि | तं | ह | स्ता | ग्र | मा | धु | न्व | ती |
| मा | मा | मु | ञ्च | श | ठे | ति | को | प | व | च | नै | रा | न | र्ति | त | भ्रू | ल | ता |
| शी | त्का | रा | ञ्चि | त | लो | च | ना | स | र | भ | सं | यै | श्चु | म्बि | ता | मा | नि | नी |
| प्रा | प्तं | तै | र | मृ | तं | मु | धै | व | म | थि | तो | मू | ढैः | सु | रैः | सा | ग | रः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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