प्रस्थानं वलयैः कृतं प्रियसखैरस्रैरजस्रं गतं
धृत्या न क्षणमासितं व्यवसितं चित्तेन गन्तुं पुरः ।
गन्तुं निश्चितचेतसि प्रियतमे सर्वे समं प्रस्थिता
गन्तव्ये सति जीवितप्रियसुहृत्सार्थः किमु त्यज्यते ॥
प्रस्थानं वलयैः कृतं प्रियसखैरस्रैरजस्रं गतं
धृत्या न क्षणमासितं व्यवसितं चित्तेन गन्तुं पुरः ।
गन्तुं निश्चितचेतसि प्रियतमे सर्वे समं प्रस्थिता
गन्तव्ये सति जीवितप्रियसुहृत्सार्थः किमु त्यज्यते ॥
धृत्या न क्षणमासितं व्यवसितं चित्तेन गन्तुं पुरः ।
गन्तुं निश्चितचेतसि प्रियतमे सर्वे समं प्रस्थिता
गन्तव्ये सति जीवितप्रियसुहृत्सार्थः किमु त्यज्यते ॥
अन्वयः
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प्रियतमे गन्तुम् निश्चितचेतसि (सति), वलयैः प्रस्थानम् कृतम् । प्रियसखैः अस्रैः अजस्रम् गतम् । धृत्या क्षणम् न आसितम् । चित्तेन पुरः गन्तुम् व्यवसितम् । सर्वे समम् प्रस्थिताः । गन्तव्ये सति, जीवित प्रिय सुहृत् सार्थः किम् उ त्यज्यते?
Summary
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When my beloved resolved to depart, my bracelets made their departure first (by slipping off). My tears, like dear friends, flowed incessantly. Fortitude did not stay for a moment. My mind resolved to go ahead. All set out together. When one must go, why indeed should the company of life's dear friends be abandoned?
पदच्छेदः
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| प्रस्थानम् | प्रस्थान (१.१) | Departure |
| वलयैः | वलय (३.३) | by the bracelets |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
| प्रियसखैः | प्रियसखि (३.३) | by the dear friends |
| अस्रैः | अस्र (३.३) | the tears |
| अजस्रम् | अजस्रम् | incessantly |
| गतम् | गत (√गम्+क्त, १.१) | was gone (flowed) |
| धृत्या | धृति (३.१) | By fortitude |
| न | न | not |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | for a moment |
| आसितम् | आसित (√आस्+क्त, १.१) | was stayed |
| व्यवसितम् | व्यवसित (वि+अव√सो+क्त, १.१) | was resolved |
| चित्तेन | चित्त (३.१) | by the mind |
| गन्तुम् | गन्तुम् (√गम्+तुमुन्) | to go |
| पुरः | पुरस् | ahead |
| गन्तुम् | गन्तुम् (√गम्+तुमुन्) | to go |
| निश्चितचेतसि | निश्चितचेतस् (७.१) | when the mind was resolved |
| प्रियतमे | प्रियतम (७.१) | the beloved |
| सर्वे | सर्व (१.३) | All |
| समम् | समम् | together |
| प्रस्थिताः | प्रस्थित (प्र√स्था+क्त, १.३) | set out |
| गन्तव्ये | गन्तव्य (√गम्+तव्य, ७.१) | when one must go |
| सति | सत् (√अस्+शतृ, ७.१) | being the case |
| जीवित | जीवित | life's |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| सुहृत् | सुहृद् | friend |
| सार्थः | सार्थ (१.१) | the company of |
| किम् | किम् | why |
| उ | उ | indeed |
| त्यज्यते | त्यज्यते (√त्यज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is abandoned |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | स्था | नं | व | ल | यैः | कृ | तं | प्रि | य | स | खै | र | स्रै | र | ज | स्रं | ग | तं |
| धृ | त्या | न | क्ष | ण | मा | सि | तं | व्य | व | सि | तं | चि | त्ते | न | ग | न्तुं | पु | रः |
| ग | न्तुं | नि | श्चि | त | चे | त | सि | प्रि | य | त | मे | स | र्वे | स | मं | प्र | स्थि | ता |
| ग | न्त | व्ये | स | ति | जी | वि | त | प्रि | य | सु | हृ | त्सा | र्थः | कि | मु | त्य | ज्य | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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