कान्ते कत्यपि वासराणि गमय त्वं मीलयित्वा दृशौ
स्वस्ति स्वस्ति निमीलयामि नयने यावन्न शून्या दिशः ।
आयाता वयमागमिष्यति सुहृद्वर्गस्य भाग्योदयैः
संदेशो वद कस्तवाभिलषितस्तीर्थेषु तोयाञ्जलिः ॥
कान्ते कत्यपि वासराणि गमय त्वं मीलयित्वा दृशौ
स्वस्ति स्वस्ति निमीलयामि नयने यावन्न शून्या दिशः ।
आयाता वयमागमिष्यति सुहृद्वर्गस्य भाग्योदयैः
संदेशो वद कस्तवाभिलषितस्तीर्थेषु तोयाञ्जलिः ॥
स्वस्ति स्वस्ति निमीलयामि नयने यावन्न शून्या दिशः ।
आयाता वयमागमिष्यति सुहृद्वर्गस्य भाग्योदयैः
संदेशो वद कस्तवाभिलषितस्तीर्थेषु तोयाञ्जलिः ॥
अन्वयः
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कान्ते, 'त्वं कति अपि वासराणि दृशौ मीलयित्वा गमय' (इति उक्ते सा आह) 'स्वस्ति स्वस्ति, यावत् दिशः शून्याः न (भवन्ति तावत्) नयने निमीलयामि' (इति । स आह) 'वयं आयाताः, सुहृद्-वर्गस्य भाग्योदयैः संदेशः आगमिष्यति' (इति । सा आह) 'कः संदेशः? तव अभिलषितः तीर्थेषु तोय-अञ्जलिः?'
Summary
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The departing lover says, "My love, just close your eyes and pass a few days." She replies, "Farewell! I will close my eyes, but only until the world becomes empty (i.e., I die)." He says, "We have come this far; by our friends' good fortune, a message will arrive." She asks, "What message do you desire? An offering of water at a holy place (after my death)?"
पदच्छेदः
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| कान्ते | कान्त (७.१) | when the lover (said) |
| कति | कति | a few |
| अपि | अपि | some |
| वासराणि | वासर (२.३) | days |
| गमय | गमय (√गम् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | pass |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| मीलयित्वा | मीलयित्वा (√मील्+णिच्+क्त्वा) | by closing |
| दृशौ | दृश् (२.२) | your eyes |
| स्वस्ति | स्वस्ति | farewell |
| स्वस्ति | स्वस्ति | farewell |
| निमीलयामि | निमीलयामि (नि√मील् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will close |
| नयने | नयन (२.२) | my eyes |
| यावत् | यावत् | until |
| न | न | not |
| शून्याः | शून्य (१.३) | empty |
| दिशः | दिश् (१.३) | the world |
| आयाताः | आयात (आ√या+क्त, १.३) | have come (this far) |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | we |
| आगमिष्यति | आगमिष्यति (आ√गम् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will arrive |
| सुहृद् | सुहृद् | friends |
| वर्गस्य | वर्ग (६.१) | of the group of |
| भाग्योदयैः | भाग्योदय (३.३) | by the good fortune |
| संदेशः | संदेश (१.१) | a message |
| वद | वद (√वद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell me |
| कः | किम् (१.१) | what |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अभिलषितः | अभिलषित (अभि√लष्+क्त, १.१) | is desired |
| तीर्थेषु | तीर्थ (७.३) | at holy places |
| तोय | तोय | water |
| अञ्जलिः | अञ्जलि (१.१) | an offering of |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | न्ते | क | त्य | पि | वा | स | रा | णि | ग | म | य | त्वं | मी | ल | यि | त्वा | दृ | शौ |
| स्व | स्ति | स्व | स्ति | नि | मी | ल | या | मि | न | य | ने | या | व | न्न | शू | न्या | दि | शः |
| आ | या | ता | व | य | मा | ग | मि | ष्य | ति | सु | हृ | द्व | र्ग | स्य | भा | ग्यो | द | यैः |
| सं | दे | शो | व | द | क | स्त | वा | भि | ल | षि | त | स्ती | र्थे | षु | तो | या | ञ्ज | लिः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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